Siwan Sadar Hospital pathology: सीवान मॉडल सदर अस्पताल की पैथोलॉजी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर मशीन का बल्ब खराब होने के कारण करीब चार दिनों से मरीजों की कई महत्वपूर्ण पैनल जांच प्रभावित है. लिपिड प्रोफाइल, लीवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) और किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी) जैसी जरूरी जांच नहीं होने से मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है. वहीं, सीरम इलेक्ट्रोलाइट जांच के लिए जरूरी रीजेंट उपलब्ध नहीं होने के कारण यह जांच भी प्रभावित बतायी जा रही है. सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिलने से मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
मशीन खराब, रीजेंट की कमी से मरीज परेशान
बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर का बल्ब खराब होने के बाद मशीन से होने वाली कई जांचें प्रभावित हो गयी हैं. दूसरी ओर, सीरम इलेक्ट्रोलाइट जांच में इस्तेमाल होने वाला रीजेंट भी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में मरीजों को जरूरी जांच के लिए निजी पैथोलॉजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है.
सवाल यह भी उठ रहा है कि करोड़ों रुपये के बजट और संसाधनों वाले सदर अस्पताल में मरीजों की नियमित और जरूरी जांच के लिए आवश्यक मशीन और रीजेंट की व्यवस्था समय रहते क्यों नहीं की जा रही है.
134 तरह की जांच कराने की जिम्मेदारी
सदर अस्पताल की पैथोलॉजी लैब के संचालन की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग ने पीओसीटी सर्विसेज को दी है. कंपनी को विभाग द्वारा निर्धारित 134 प्रकार की पैथोलॉजी जांच मरीजों को उपलब्ध करानी है. इसके लिए पीओसीटी सर्विसेज की ओर से चार लैब टेक्नीशियन और एक डेटा ऑपरेटर की ड्यूटी लगायी गयी है.
अस्पताल प्रशासन की ओर से भी सहयोग के लिए तीन लैब टेक्नीशियनों को लगाया गया है. इसके अलावा अस्पताल की ओर से कई जांच उपकरण भी उपलब्ध कराये गये हैं. इसके बावजूद महत्वपूर्ण जांचों का लगातार प्रभावित होना लैब व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है.
चार दिन बाद भी वैकल्पिक व्यवस्था पर सवाल
मरीजों का कहना है कि मशीन खराब होने के बाद यदि उसे ठीक होने में समय लग रहा था तो जरूरी जांचों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी. खासकर लिपिड प्रोफाइल, एलएफटी और केएफटी जैसी जांच इलाज के लिए महत्वपूर्ण होती हैं. सरकारी अस्पताल में इनकी सुविधा नहीं मिलने पर मरीजों को बाहर जांच कराने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
कंपनी बदलने की कवायद के बीच जांच व्यवस्था प्रभावित
बताया जा रहा है कि सदर अस्पताल की लैब के संचालन की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की ओर से साइंस लैब को देने की तैयारी चल रही है. इसके लिए अस्पताल की तीसरी मंजिल पर जगह भी उपलब्ध करा दी गयी है.
चर्चा है कि कंपनी बदलने की प्रक्रिया के कारण पुरानी कंपनी पीओसीटी सर्विसेज जांच कार्य में पहले जैसी रुचि नहीं ले रही है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यदि ऐसा है तो मरीजों की जांच व्यवस्था को कंपनियों के बीच बदलाव या प्रशासनिक प्रक्रिया से प्रभावित होना गंभीर मामला है.
निजी जांच केंद्रों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
सदर अस्पताल में इलाज कराने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं. ऐसे मरीजों के लिए लिपिड प्रोफाइल, एलएफटी, केएफटी और इलेक्ट्रोलाइट जैसी जांच निजी केंद्रों से कराना अतिरिक्त खर्च है. मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर, दवा और जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद रहती है. जरूरी जांच के लिए भी बाहर जाना पड़े तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता है.
मरीज पूछ रहे- सरकारी अस्पताल में जांच कब मिलेगी?
एक तरफ सदर अस्पताल में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर मशीन के एक बल्ब और रीजेंट की कमी के कारण जरूरी जांच प्रभावित है. ऐसे में मरीजों के बीच सवाल उठ रहा है कि उन्हें सरकारी अस्पताल में नियमित जांच की सुविधा कब तक मिल सकेगी.
मरीजों की मांग है कि अस्पताल प्रशासन खराब मशीन को जल्द दुरुस्त कराये और जांच के लिए जरूरी रीजेंट की उपलब्धता सुनिश्चित करे, ताकि उन्हें निजी जांच केंद्रों पर अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करने पड़ें.
क्या कहते हैं नोडल ऑफिसर
सदर अस्पताल के नोडल ऑफिसर डॉ. अनूप कुमार दुबे ने बताया कि कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर का नया बल्ब आ गया है. बल्ब लगाने के लिए इंजीनियर को सूचना दी गयी है. जल्द ही पैनल जांच शुरू हो जाएगी.
