सीवान. सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और छात्रों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अब 11वीं और 12वीं कक्षा में सड़क सुरक्षा शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा. वर्ष 2027 से इसे नए पाठ्यक्रम में लागू करने की तैयारी है. इस दिशा में परिवहन विभाग पहल कर रहा है.
तीसरी से दसवीं तक पहले से दी जा रही सड़क सुरक्षा शिक्षा
शिक्षा विभाग की ओर से पहले ही कक्षा तीन से दसवीं तक के बच्चों को सड़क सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी जा रही है. इसमें पैदल यात्रियों की सुरक्षा, ट्रैफिक सिग्नल का पालन, तेज रफ्तार से वाहन चलाने से बचना, गलत लेन में वाहन नहीं चलाना, नशे में ड्राइविंग से परहेज, वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करना और दुर्घटना में घायलों की तत्काल मदद जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं.
उच्च कक्षाओं तक बढ़ाया जाएगा सड़क सुरक्षा का दायरा
अब सड़क सुरक्षा शिक्षा को 11वीं और 12वीं कक्षा तक विस्तारित करने का निर्णय लिया गया है. विभाग का मानना है कि स्कूल स्तर से ही छात्रों को यातायात नियमों और सुरक्षित वाहन संचालन की जानकारी देने से भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है.
चालक और पुलिस कर्मियों को भी किया जा रहा जागरूक
परिवहन विभाग की ओर से चालकों, कंडक्टरों और पुलिस कर्मियों को भी यातायात नियमों, सुरक्षित ड्राइविंग के तरीकों, आधुनिक वाहन तकनीक और दुर्घटना के बाद की कार्रवाई को लेकर प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाने का काम किया जा रहा है.
जागरूकता की कमी भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह
परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल दुर्भाग्य का परिणाम नहीं हैं, बल्कि कई बार जागरूकता की कमी भी इसका कारण बनती है. विभाग का प्रयास है कि बच्चे स्कूल से ही सड़क सुरक्षा के नियम, ट्रैफिक संकेत और सुरक्षित ड्राइविंग की आदतों को सीखें.
जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम
जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सड़क सुरक्षा शिक्षा की यह पहल छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ी यदि यातायात नियमों को लेकर जागरूक होगी तो राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
