सीवान में नई चीनी मिल की कवायद तेज, 50 से 70 एकड़ जमीन चिन्हि्त करने का निर्देश

सीवान जिले में चीनी उद्योग के पुनरुद्धार की उम्मीद जगी है. बिहार सरकार की पहल पर नई चीनी मिल की स्थापना के लिए 50-70 एकड़ उपयुक्त भूमि की तलाश की जा रही है. यह कदम जिले के किसानों के लिए आर्थिक मजबूती और रोजगार के नए अवसर ला सकता है.

Siwan News : सीवान जिले में एक बार फिर चीनी उद्योग के पुनर्जीवित होने की उम्मीद जगी है. गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार ने प्रस्तावित नई चीनी मिल की स्थापना की दिशा में पहल तेज कर दी है. इसी क्रम में ईख पदाधिकारी ने जिले के सभी अंचलाधिकारियों को पत्र भेजकर अपने-अपने क्षेत्र में 50 से 70 एकड़ उपयुक्त भूमि चिन्हित कर उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

भूमि उपलब्ध होने पर आगे बढ़ेगी चीनी मिल स्थापना की प्रक्रिया

विभागीय पत्र में कहा गया है कि अंचल स्तर पर उपयुक्त भूमि चिन्हित होने के बाद उसकी विस्तृत रिपोर्ट गन्ना उद्योग विभाग को भेजी जाएगी. इसके आधार पर नई चीनी मिल की स्थापना को लेकर तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. विभाग का मानना है कि पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के बाद परियोजना को गति मिल सकेगी.

कभी गन्ना उत्पादन का प्रमुख केंद्र था सीवान

एक समय सीवान बिहार के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में शामिल था. जिले की सीवान और पचरुखी चीनी मिलें हजारों किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार थीं. इन मिलों के बंद होने के बाद किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे जिलों की चीनी मिलों पर निर्भर होना पड़ा. इससे परिवहन लागत बढ़ी और किसानों का मुनाफा लगातार घटता गया.

पुरानी मिलों की वापसी की संभावना लगभग खत्म

जिले की पुरानी चीनी मिलों की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है. सीवान शहर स्थित दोनों चीनी मिलों की जमीन पर उद्योग विभाग औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया चला रहा है, जबकि पचरुखी चीनी मिल की जमीन की नीलामी हो चुकी है. ऐसे में पुराने परिसरों में चीनी मिल दोबारा शुरू होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है. यही कारण है कि सरकार नई जगह पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है.

नई चीनी मिल से किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

जानकारों का मानना है कि यदि अंचलाधिकारी 50 से 70 एकड़ उपयुक्त भूमि उपलब्ध करा देते हैं और सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो सीवान में नई चीनी मिल स्थापित होने का रास्ता साफ हो जाएगा. इससे जिले के बंद पड़े चीनी उद्योग को नया जीवन मिलेगा, गन्ना किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी फसल का बेहतर बाजार मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे. फिलहाल जिलेभर की निगाहें भूमि चिन्हीकरण की प्रक्रिया पर टिकी हैं.


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Author: Prabhat khabar news desk

Published by: Rajeev Kumar

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