महाराजगंज अनुमंडल क्षेत्र में सीवान ग्रिड से पर्याप्त बिजली मिलने के बावजूद जर्जर बुनियादी ढांचे और नियमित रखरखाव के अभाव ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. 33 हजार और 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइनें समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण बार-बार बाधित हो रही हैं. शहरी, ग्रामीण, बसंतपुर और तरवारा फीडर लगातार ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहे हैं.
हल्की बारिश में 8 से 15 घंटे तक रहती है बिजली गुल
स्थानीय लोगों के अनुसार हल्की बूंदाबांदी या तेज हवा चलते ही बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है. कई बार यह कटौती 8 से 12 घंटे तक जारी रहती है, जबकि महाराजगंज और दारौंदा प्रखंड के कई गांवों में 10 से 15 घंटे तक बिजली नहीं रहती. इसके अलावा दिनभर कई बार ट्रिपिंग होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कमजोर पोल और ट्रांसफॉर्मर बने बड़ी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने पोल, कमजोर इंसुलेटर और जर्जर बिजली लाइनें मामूली मौसम परिवर्तन भी नहीं झेल पा रही हैं. बारिश के दौरान इंसुलेटर पंक्चर हो जाते हैं और ब्रैकेट टूटने से लाइन ब्रेकडाउन हो जाती है. वहीं कई गांवों में 63 केवी के एक ट्रांसफॉर्मर पर तीन से चार गांवों का लोड होने के कारण लो वोल्टेज की गंभीर समस्या बनी हुई है.
मेंटेनेंस के दावों पर उठ रहे सवाल
उपभोक्ताओं का आरोप है कि हर वर्ष मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर इसका असर दिखाई नहीं देता. बिजली तारों के ऊपर झुकी पेड़ों की डालियां और बांस के झुरमुट तक समय पर नहीं हटाए जाते, जिससे मामूली हवा चलने पर भी बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है.
अधिकारी ने बताई ट्रिपिंग की वजह
बिजली एसडीओ दिलीप कुमार ने बताया कि सिवान ग्रिड से महाराजगंज पावर सबस्टेशन की दूरी करीब 25 किलोमीटर और रिसौरा से 15 किलोमीटर है. लंबी बिजली लाइन खेतों और बगीचों से होकर गुजरती है. तेज हवा में पेड़ों की डालियां तारों पर गिरने से इंसुलेटर पंक्चर हो जाते हैं, ब्रैकेट और कई बार पोल भी टूट जाते हैं. इसी कारण बिजली आपूर्ति बाधित होती है और मरम्मत में काफी समय लग जाता है.
