Siwan News : नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए बड़ा निर्णय लिया है. विभाग ने फरवरी में जारी उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें 15 लाख रुपये तक की योजनाओं का विभागीय स्तर पर क्रियान्वयन रोकते हुए सभी कार्यों को ई-टेंडर के माध्यम से कराने का निर्देश दिया गया था. नए आदेश के बाद अब 24 अगस्त 2023 को लागू व्यवस्था फिर से प्रभावी हो गई है. इसके तहत 15 लाख रुपये तक की योजनाओं का विभागीय स्तर पर कार्यान्वयन किया जा सकेगा.
व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए लिया गया निर्णय
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नगर निकायों को योजनाओं के क्रियान्वयन में कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. इन समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने विचार-विमर्श के बाद 25 फरवरी को जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्णय लिया है. साथ ही 24 अगस्त 2023 को जारी पुराने निर्देशों को दोबारा लागू कर दिया गया है.
फरवरी के आदेश में लगाई गई थी विभागीय कार्यों पर रोक
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर निकायों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 15 लाख रुपये तक के विभागीय कार्यों पर रोक लगा दी थी. उस समय सभी योजनाओं का क्रियान्वयन केवल ई-टेंडर के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया था. इसके अलावा जिन योजनाओं पर कार्य शुरू नहीं हुआ था, उन्हें विभागीय तरीके से कराने या नया कार्यादेश जारी करने पर भी रोक लगा दी गई थी.
छोटे विकास कार्यों में आएगी तेजी
विभाग के नए फैसले के बाद नगर परिषद और नगर पंचायतों को राहत मिलने की उम्मीद है. अब छोटे और जरूरी विकास कार्यों को पहले की तरह विभागीय स्तर पर कराया जा सकेगा. ई-टेंडर प्रक्रिया के कारण जिन योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो रही थी, उन्हें अब तेजी से पूरा किया जा सकेगा. नगर निकायों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गति बढ़ेगी.
गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने का निर्देश
नगर विकास एवं आवास विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और वित्तीय नियमों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा. विभाग के इस निर्णय को नगर निकायों की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. अब नगर परिषद और नगर पंचायतें 15 लाख रुपये तक की योजनाओं को पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विभागीय स्तर पर पूरा कर सकेंगी, जिससे छोटे विकास कार्य समय पर पूरे होने की संभावना बढ़ेगी.
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