सीवान: धान अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 के तहत सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाले जिले के 19 पैक्स अध्यक्षों एवं प्रबंधकों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है. जिला सहकारिता पदाधिकारी ने संबंधित पैक्सों को लीगल नोटिस जारी करते हुए 31 जुलाई 2026 तक राज्य खाद्य निगम को लंबित सीएमआर उपलब्ध कराने का अंतिम निर्देश दिया है. समय सीमा के भीतर चावल की आपूर्ति नहीं होने पर संबंधित पैक्सों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने, राशि की वसूली करने तथा अन्य विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
सीएमआर आपूर्ति में बरती गई लापरवाही
जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित पैक्सों ने धान अधिप्राप्ति के अनुरूप सीएमआर की पूरी आपूर्ति नहीं की है. अधिकांश मामलों में राज्य खाद्य निगम द्वारा एसटीआर पहले ही जारी किया जा चुका है, लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर चावल की आपूर्ति नहीं की गई. विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता माना है.
इन 19 पैक्सों को जारी हुआ नोटिस
नोटिस प्राप्त करने वाले पैक्सों में रुकुन्दीपुर (84.991 मीट्रिक टन), बाल बंगरा (55.991), दरौली (113.417), चकरी (84.417), कुमटी भिटौली (83.843), सरहरवा (112.556), बेलाव (141.556), हरनाटांड़ (200.130), दोन बुजुर्ग (54.269), बलडीहा (55.991), नरेन्द्रपुर (197.834), सादीपुर (29), सानी बसंतपुर (29), बलहा एलाजी (113.130), सागर सुल्तानपुर उत्तर (84.130), बहादुरपुर (84.991), बहुआरा कादिर (171.417), कैलगढ़ उत्तर (56.278) तथा जयजोर पैक्स (83.556 मीट्रिक टन) शामिल हैं. इन सभी पर सीएमआर आपूर्ति लंबित है.
गबन की आशंका, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
नोटिस में कहा गया है कि सीएमआर आपूर्ति की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है. इसके बावजूद चावल उपलब्ध नहीं कराए जाने से अवशेष सीएमआर के गबन की आशंका व्यक्त की गई है. साथ ही संबंधित पैक्सों पर विभागीय निर्देशों का पालन नहीं करने, राज्य खाद्य निगम, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और संबद्ध राइस मिलरों को वित्तीय क्षति पहुंचाने तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.
31 जुलाई तक नहीं हुई आपूर्ति तो होगी FIR
जिला सहकारिता पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि तक लंबित सीएमआर की आपूर्ति नहीं होने पर संबंधित समितियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी. इसके अलावा बकाया राशि की वसूली की जाएगी, समितियों को डिफॉल्टर घोषित किया जाएगा तथा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में जमा उनकी शेयर राशि से समायोजन किया जाएगा. साथ ही संबंधित पैक्सों को बैंक से असंबद्ध कर दिया जाएगा, जिससे वे बैंक के निदेशक मंडल के चुनाव में मतदान का अधिकार भी खो देंगे.
