सीवान में महावीरी अखाड़ा मेले के दौरान सदर अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, 18 बेड पर पहुंचे 24 गंभीर मरीज

सीवान महावीरी मेले के दौरान सदर अस्पताल की विशेष व्यवस्था फेल नजर आई। मरीजों की भारी भीड़ और संसाधनों की कमी से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

Siwan Mahaviri Akhada : सीवान शहर में महावीरी अखाड़ा मेले को लेकर सदर अस्पताल प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था का दावा किया था. अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह की ओर से विशेष रोस्टर जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी. हालांकि, मेले के दौरान सदर अस्पताल के आपात कक्ष में उपलब्ध संसाधनों और मरीजों की संख्या के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. अतिरिक्त व्यवस्था का असर मौके पर अपेक्षाकृत सीमित नजर आया.

आपात कक्ष में एक डॉक्टर और तीन नर्सिंग स्टाफ

मेले के दौरान आपात कक्ष में एक डॉक्टर, तीन नर्सिंग स्टाफ और दो चतुर्थवर्गीय कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद थे. सामान्य दिनों में डॉक्टर की सहायता के लिए आयुष चिकित्सक की व्यवस्था रहने की बात बतायी जाती है, लेकिन रविवार को आयुष चिकित्सक मौजूद नहीं थे. वहीं, नर्सिंग कॉलेज के प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के कुछ प्रशिक्षु छात्र भी आपात कक्ष में सहयोग करते दिखे.

18 बेड पर करीब 24 गंभीर मरीज

मरीजों की संख्या बढ़ने से आपात कक्ष पर दबाव काफी बढ़ गया. आपात कक्ष की क्षमता 18 बेड की है, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों की संख्या करीब 24 बतायी गयी. बेड उपलब्ध नहीं होने पर कुछ मरीजों के परिजन उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर खाली बेड का इंतजार करते दिखे.

इसी दौरान छत से गिरने के बाद अपने छोटे बच्चे को लेकर पहुंची श्राविका नामक महिला बच्चे को लिटाने के लिए जगह तलाशती नजर आयी. आपात कक्ष में भीड़ बढ़ने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.

एक मरीज को दो टीटी इंजेक्शन देने की शिकायत

मारपीट की घटना में घायल पचरुखी प्रखंड के अल्लापुर निवासी हरिवंश सिंह के मामले में परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रशिक्षु नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें दो टीटी इंजेक्शन लगा दिए. यदि यह आरोप सही है, तो यह गंभीर मामला है. अस्पताल प्रशासन को इसकी जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि इंजेक्शन किस परिस्थिति में और किसके निर्देश पर लगाया गया.

32 घंटे में 572 मरीजों का इलाज

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार की रात 12 बजे से सोमवार की सुबह आठ बजे तक आपात कक्ष में कुल 572 मरीजों का इलाज किया गया. रात करीब साढ़े नौ बजे मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि होने की बात भी सामने आयी. इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के बीच एक डॉक्टर और तीन नर्सिंग स्टाफ पर काम का दबाव काफी बढ़ गया.

मेडिको-लीगल केस की सूचना में भी दबाव

लगातार मरीजों के उपचार में डॉक्टरों के व्यस्त रहने के कारण मेडिको-लीगल केस की सूचना पुलिस को देने की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की बात सामने आयी. ऐसे में बड़े आयोजनों के दौरान आपात चिकित्सा व्यवस्था के साथ-साथ मेडिको-लीगल प्रक्रिया के लिए भी अतिरिक्त मानव संसाधन की जरूरत महसूस हुई.

बड़े आयोजनों में अतिरिक्त संसाधन की जरूरत

महावीरी अखाड़ा मेले में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने पहले से विशेष रोस्टर तैयार किया था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आपात कक्ष में तैनात मानव संसाधन संभावित मरीजों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त था.

मरीजों की संख्या, सीमित बेड और उपलब्ध स्टाफ के बीच बढ़े दबाव ने यह संकेत दिया कि बड़े आयोजनों के दौरान सदर अस्पताल की आपात सेवा में अतिरिक्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, बेड और अन्य संसाधनों की व्यवस्था जरूरी है. वहीं, दो टीटी इंजेक्शन लगाए जाने की शिकायत जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. मेले के दौरान अस्पताल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की आपात कक्ष में मौजूदगी और व्यवस्था की समीक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं. ऐसे में विशेष व्यवस्था का दावा कितना प्रभावी रहा, इसका आकलन मरीजों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाना जरूरी है.

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By अमरनाथ शर्मा

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