विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट सीवान: जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मैरवा शाखा को सेवानिवृत्त शिक्षक रमाशंकर साहू के खाते से गलत तरीके से काटी गयी करीब 56 हजार रुपये की राशि वापस करने का आदेश दिया है. आयोग ने बैंक की कार्यशैली को सेवा में कमी मानते हुए राशि को ब्याज सहित लौटाने के साथ मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के लिए मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है.
आवास ऋण के लिए लिया था कर्ज
नौतन थाना क्षेत्र के किलपुर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रमाशंकर साहू ने मकान निर्माण के लिए एसबीआई की मैरवा शाखा से आवास ऋण लिया था. उनके अनुसार बैंक की ओर से मांगे गये सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद उन्होंने ऋण की दो किस्तों में दो लाख रुपये की मूल राशि जमा की. इसके अलावा समय-समय पर ब्याज का भी भुगतान करते रहे.
कुछ समय बाद उनके आवास ऋण खाते में केवल 56,886 रुपये बकाया रह गये थे.
व्यक्तिगत ऋण से काटकर आवास ऋण में समायोजित की राशि
बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत होने पर रमाशंकर साहू ने बैंक से व्यक्तिगत ऋण लिया. बैंक ने उन्हें 2.80 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण स्वीकृत किया. आरोप है कि बैंक ने इसी ऋण की राशि में से 56,886 रुपये काटकर पुराने आवास ऋण के बकाये का समायोजन कर दिया. इसके बाद बैंक की ओर से उन्हें आवास ऋण का एनओसी भी जारी कर दिया गया.
दूसरी बार भी 56 हजार रुपये काटने का आरोप
कुछ समय बाद बैंक ने उनकी अच्छी साख को देखते हुए पांच लाख रुपये का एक और व्यक्तिगत ऋण दिया. आरोप है कि इस ऋण की राशि से भी बैंक ने दोबारा करीब 56 हजार रुपये काट लिये और राशि किसी दूसरे खाते में भेज दी.
रमाशंकर साहू ने बैंक को पहले से जारी एनओसी दिखाते हुए राशि काटे जाने पर आपत्ति जतायी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर न्याय की गुहार लगायी.
आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानी
मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद और सदस्य मनमोहन कुमार ने की. आयोग ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की. इसके बाद आयोग ने बैंक की ओर से सेवा में स्पष्ट कमी माना.
6 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि लौटाने का आदेश
आयोग ने एसबीआई की मैरवा शाखा को गलत तरीके से काटी गयी करीब 56 हजार रुपये की राशि 11 फरवरी 2015 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 30 दिनों के भीतर वापस करने का आदेश दिया है.
इसके अलावा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा तथा पांच हजार रुपये वाद खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया गया है. इस तरह बैंक को 15 हजार रुपये अतिरिक्त भी भुगतान करने होंगे.
समय पर भुगतान नहीं किया तो बढ़ेगा ब्याज
आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि यदि बैंक 30 दिनों के भीतर राशि का भुगतान नहीं करता है, तो करीब 56 हजार रुपये की मूल राशि पर छह प्रतिशत के बजाय नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा.
वहीं, 60 दिनों के बाद भी आदेश का पालन नहीं होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत बैंक के खिलाफ आगे कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
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