सीवान: बाइक का ट्रांसफर छह साल से अटका, उपभोक्ता आयोग ने कहा- यह प्रशासनिक मामला

सीवान जिला उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि डीटीओ के खिलाफ नामांतरण में देरी का मामला उपभोक्ता वाद के अंतर्गत नहीं आता है। यह प्रशासनिक लापरवाही का विषय है।

Siwan News : मोटरसाइकिल का छह साल से नामांतरण नहीं होने को लेकर जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO), सीवान के खिलाफ दायर उपभोक्ता वाद को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वीकार योग्य नहीं माना है. आयोग ने स्पष्ट किया कि वाहन का रजिस्ट्रेशन और नामांतरण जैसे परिवहन संबंधी कार्य डीटीओ के वैधानिक दायित्व हैं और इसके लिए लिया जाने वाला सरकारी शुल्क या कर व्यावसायिक प्रतिफल नहीं है.

शिकायतकर्ता ने छह साल से नामांतरण नहीं होने का लगाया आरोप

नगर निवासी आशीष विजयादित्य ने आयोग में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनकी मोटरसाइकिल का पिछले छह वर्षों से उनके नाम पर नामांतरण नहीं किया जा रहा है. उन्होंने अपने पक्ष में विक्रय पत्र, अनापत्ति प्रमाण पत्र और डीटीओ को भुगतान की गयी राशि से संबंधित दस्तावेज भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत किये थे.

दूसरे नोटिस पर आयोग पहुंचे डीटीओ, जवाब नहीं किया दाखिल

मामले में जिला परिवहन पदाधिकारी दूसरे नोटिस पर आयोग के समक्ष उपस्थित हुए, लेकिन उन्होंने अपना जवाब दाखिल नहीं किया. इसके बाद आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद और सदस्य मनमोहन कुमार ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र और दस्तावेजों की समीक्षा की.

सरकारी शुल्क देने से नहीं बनता उपभोक्ता-सेवा प्रदाता संबंध

आयोग ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, वाहन का रजिस्ट्रेशन और अन्य परिवहन संबंधी कार्य डीटीओ के वैधानिक दायित्व हैं. इन कार्यों के लिए लिया जाने वाला सरकारी शुल्क या कर व्यावसायिक प्रतिफल की श्रेणी में नहीं आता है. इसलिए डीटीओ और नागरिक के बीच उपभोक्ता तथा सेवा प्रदाता का संबंध स्थापित नहीं होता.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

आयोग ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के सीजी गोयल बनाम कलेक्टर ऑफ स्टांप, दिल्ली मामले में दिये गये निर्णय का भी उल्लेख किया. इसी कानूनी आधार पर आयोग ने माना कि परिवहन विभाग की ऐसी वैधानिक सेवाओं को उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सामान्य व्यावसायिक सेवा नहीं माना जा सकता.

नामांतरण में देरी प्रशासनिक लापरवाही का विषय

आयोग ने कहा कि वाहन के नामांतरण में देरी को उपभोक्ता कानून के तहत ‘डिफिशिएंसी इन सर्विस’ नहीं माना जा सकता. हालांकि, परिस्थितियों के आधार पर यह प्रशासनिक लापरवाही का विषय हो सकता है. ऐसे मामले में शिकायतकर्ता को उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत वरीय पदाधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखनी चाहिए.

उपभोक्ता आयोग ने वाद को नहीं माना उपभोक्ता विवाद

इन आधारों पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले को उपभोक्ता विवाद की श्रेणी में नहीं माना. आयोग के फैसले का मुख्य आधार यह रहा कि डीटीओ द्वारा किये जाने वाले वैधानिक परिवहन कार्यों के लिए लिया गया सरकारी शुल्क उन्हें उपभोक्ता कानून के तहत ‘सेवा प्रदाता’ नहीं बनाता.

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By Vivek Kumar

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