पीडीएस डीलरों को 15 दिनों के अंदर सभी लाभुकों का कराना होगा इ-केवाइसी

इ-केवाइसी के मामले में सीवान जिला सूबे में सबसे निचले पायदान पर, महाराजगंज अनुमंडल में अब तक 74.65 प्रतिशत केवाइसी

सीवान . राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आच्छादित लाभुकों का इ-केवाइसी शत-प्रतिशत कराने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. महाराजगंज अनुमंडल क्षेत्र के सभी जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे अगले 15 दिनों के भीतर अपने-अपने पोषक क्षेत्र के सभी लाभुकों का इ-केवाइसी अनिवार्य रूप से पूरा कराएं. इसके साथ ही मृत, स्थायी रूप से पलायित, विवाहित अथवा अपात्र लाभुकों की सूची तीन दिनों के अंदर संबंधित प्रखंड आपूर्ति कार्यालय के माध्यम से उपलब्ध कराने को कहा गया है.

समीक्षा के दौरान यह सामने आया है कि इ-केवाइसी के मामले में सीवान जिला पूरे बिहार में सबसे निचले पायदान पर है. इसको लेकर विभागीय स्तर से लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं. डीएम द्वारा भी कई बार स्पष्ट रूप से कहा जा चुका है कि इ-केवाइसी में तेजी लायी जाये, ताकि पात्र लाभुकों को समय पर और पारदर्शी तरीके से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके.

महाराजगंज अनुमंडल में 8.50 लाख लाभुक

समीक्षा बैठक में महाराजगंज अनुमंडल की स्थिति सामने आई. आंकड़ों के अनुसार अनुमंडल में कुल लाभुकों की संख्या 8 लाख 94 हजार 351 है, जिनमें से अब तक 6 लाख 68 हजार 184 लाभुकों का ही इ-केवाइसी हो सका है. अभी भी 2 लाख 26 हजार 167 लाभुक ऐसे हैं, जिनका इ-केवाइसी लंबित है. इस प्रकार महाराजगंज अनुमंडल में 74.65 प्रतिशत केवाइसी ही हुआ है, जो संतोषजनक नहीं है.

एसडीओ का कहना है कि सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, आपूर्ति निरीक्षक और अनुमंडल स्तर से जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं को बार-बार निर्देश दिया गया है कि वे व्यापक प्रचार-प्रसार कर लाभुकों को इ-केवाइसी के लिए प्रेरित करें. इसके बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं होना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है. अधिकारियों का मानना है कि कुछ विक्रेता इस महत्वपूर्ण कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिसे स्वेच्छाचारिता और आदेशों की अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है. निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि जिन लाभुकों का इ-केवाइसी मृत, स्थायी रूप से पलायित, विवाहित या अपात्र होने के कारण नहीं हो पाया है, उनकी अलग सूची बनाकर तीन दिनों के भीतर जमा करायी जाये. इसके अलावा ऐसे लाभुक जो जानबूझकर ई-केवाईसी नहीं कराना चाहते हैं, उनकी भी सूची उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा.

मृतकों के नाम पर खाद्यान्न वितरण को माना जायेगा कालाबाजारी

एसडीओ ने चेतावनी दी है कि यदि किसी विक्रेता द्वारा निर्धारित समय सीमा में सूची उपलब्ध नहीं कराई जाती है और भविष्य में जांच के दौरान यह पाया जाता है कि मृत, पलायित, विवाहित या अपात्र लाभुकों के नाम पर खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा है, तो इसे खाद्यान्न का गबन या कालाबाजारी माना जाएगा. ऐसी स्थिति में संबंधित विक्रेता के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-7 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी. स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी का उद्देश्य केवल आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि वास्तविक और पात्र लाभुकों तक सरकारी योजना का लाभ पहुंचाना है. इस कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा

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