सीवान : शनिवार की रात करीब दस बजे मुफस्सिल थाने की पुलिस महिला सिपाही स्नेहा की सड़ी-गली लाश को लेकर पोस्टमार्टम कराने के लिए सदर अस्पताल पहुंची. लेकिन मेडिकल बोर्ड के निर्णय के आलोक में ड्यूटी पर तैनात डॉ. आलोक कुमार सिंह ने शव का पोस्टमार्टम करने के लिए पीएमसीएच रेफर कर दिया जिससे वहां मौजूद पुलिसकिर्मयों के साथ पुलिस पदाधिकारी गुस्से में आ गये.
पहले तो पुलिसकर्मियों ने डॉक्टर व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को गाली देते हुए खरी-खोटी सुनायी. उसके बाद अचानक करीब एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी डॉक्टर आलोक कुमार सिंह पर टूट पड़े. कोई बंदूक के कुंदे से पीटने लगा तो कोई थप्पड़ से. खून से सने डॉक्टर ने भाग कर सदर अस्पताल परिसर में स्थित स्वीपर के आवास में छिप कर जान बचायी.
थोड़ी देर बाद कर्मचारियों ने दीवार फंदवाकर डॉक्टर आलोक कुमार सिंह को परिसर से बाहर निकाला. हंगामा होता देख आपातकक्ष में भर्ती मरीज के परिजन भी दहशत में आ गये और अपने मरीजों को लेकर निकल गये. करीब आधा घंटे तक पुलिसकिर्मयों ने इस तरह तांडव मचाया.
नजारा देखकर लग रहा था कि उनके वरीय अधिकरियों का समर्थन पुलिसकर्मियों को प्राप्त है.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने डॉक्टर के ऊपर हथियार भी तान कर सीवान में ही पोस्टमार्टम करने का दबाव बनाया. इस दौरान नगर इंस्पेक्टर जय प्रकाश पंडित,मुफस्सिल थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार तथा महादेवा ओपी प्रभारी पंकज ठाकुर सहित कई अन्य वरीय पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे. लेकिन उनके द्वारा कोई बीच-बचाव नहीं किया गया.
जब डॉक्टर व कर्मचारी अस्पताल छोड़कर चले गये, तो रात करीब ढाई बजे पुलिसकर्मी महिला सिपाही की लाश को लेकर पीएमसीएच चले गये. पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा मारपीट की घटना के बाद सदर अस्पताल पहुंचे लेकिन कुछ देर रुकने के बाद वापस चले गये. करीब साढ़े तीन बजे उपाधीक्षक डॉ. एमके आलम तथा डीपीएम ठाकुर विश्वमोहन आये तथा कुछ मिनट सदर अस्पताल में रहने के बाद चले गये.
सुबह करीब 4 बजे सदर एसडीओ संजीव कुमार भी सदर अस्पताल पहुंचे और सुरक्षा में तैनात गार्ड से पूछताछ करने के बाद वापस लौट गये. रात की घटना को लेकर सदर अस्पताल की आपात सेवा पूरी तरह से ठप हो गयी है. आपात कक्ष में कोई डॉक्टर व कर्मचारी उपस्थित नहीं है.
