सीतामढ़ी में एसएसबी की बड़ी पहल, 22 सीमावर्ती महिलाओं को मिलेगा 30 दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण

सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 30 दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया है. यह पहल गृह मंत्रालय के तत्वावधान में मानव संसाधन विकास कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना है.

SSB Women Training: भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय कदम उठाया गया है. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 20वीं वाहिनी की ओर से  30 दिवसीय (एक महीने) सिलाई प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया. यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के तत्वावधान में और रेनबो एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट के सहयोग से मानव संसाधन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है. इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्र की युवतियों और महिलाओं में स्वरोजगार को लेकर एक नया उत्साह देखा जा रहा है.

कार्यवाहक कमांडेंट के मार्गदर्शन में शुरुआत, प्रखंड कार्यालय परिसर बैरगनिया में चलेगा प्रशिक्षण

इस महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 20वीं वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट विकास दीप सिंह के कुशल मार्गदर्शन में किया गया. यह पूरा प्रशिक्षण सत्र एसएसबी की सीमा चौकी (बीओपी) बैरगनिया के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत प्रखंड कार्यालय परिसर (बैरगनिया) में संचालित किया जा रहा है. इस 30 दिवसीय सिलाई कोर्स में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चयनित ग्राम बखरी और नॉन-वाइब्रेंट ग्राम मसहा आलम की कुल 22 सीमावर्ती युवतियां एवं महिलाएं पूरी सक्रियता के साथ भाग ले रही हैं.

महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना लक्ष्य

एसएसबी द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र की महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने के लिए पूरी तरह सक्षम बनाना है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का संबल बन सकें. उद्घाटन के इस गरिमामयी अवसर पर एसएसबी के उप कमांडेंट सुमित भारद्वाज, बैरगनिया के बीडीओ सुशील कुमार गौड़, सहायक कमांडेंट हिमांशु सिंह, निरीक्षक सामान्य अविनाश कुमार सहित कई अन्य गणमान्य लोग, मुख्य प्रशिक्षक और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे.


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राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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