अंतर जिला शिव गुरु महोत्सव में बोले वक्ता, शिव शिष्य होने के लिए पारंपरिक औपचारिकता अथवा दीक्षा की आवश्यकता नहीं

शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन द्वारा प्रखंड के प्रेमनगर गांव में अंतर जिला शिव गुरु महोत्सव आयोजित किया गया.

सीतामढ़ी/रून्नीसैदपुर. शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन द्वारा प्रखंड के प्रेमनगर गांव में अंतर जिला शिव गुरु महोत्सव आयोजित किया गया. कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सीतामढ़ी जिला के विभिन्न गांव-कस्बों समेत शिवहर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, मोतिहारी, समस्तीपुर के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. शिव शिष्य साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी के संदेश को लेकर आयी कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनंद ने कहा कि शिव केवल नाम के नहीं अपितु काम के गुरु हैं. शिव के औढरदानी स्वरूप से धन, धान्य, संतान, सम्पदा आदि प्राप्त करने का व्यापक प्रचलन है तो उनके गुरु स्वरूप से ज्ञान भी क्यों नहीं प्राप्त किया जाये. किसी संपत्ति या संपदा का उपयोग जान के अभाव में घातक हो सकता है. शिव जगतगुरु हैं अतएव जगत का एक-एक व्यक्ति चाहे वह किसी धर्म, जाति, संप्रदाय, लिंग का हो शिव को अपना गुरु बना सकता है. शिव का शिष्य होने के लिए किसी पारंपरिक औपचारिकता अथवा दीक्षा की आवश्यकता नहीं है. केवल यह विचार कि “शिव मेरे गुरु हैं ” शिव की शिष्यता की स्वमेव शुरूआत करता है. इसी विचार का स्थायी होना हमको आपको शिव का शिष्य बनाता है. कहा कि श्री हरीन्द्रानन्द जी ने सन् 1974 में शिव को अपना गुरु माना. 1980 के दशक तक आते-आते शिव की शिष्यता की अवधारणा भारत भूखंड के विभिन्न स्थानों पर व्यापक तौर पर फैलती चली गई. शिव शिष्य साह्य श्री हरीन्द्रानन्द जी और उनकी धर्मपत्नी दीदी नीलम आनंद जी के द्वारा जाति, धर्म, लिंग, वर्ण, सम्प्रदाय आदि से परे मानव मात्र को भगवान शिव के गुरु स्वरूप से जुड़ने का आह्वान किया गया.

–भगवान शिव के गुरु स्वरूप से एक-एक व्यक्ति से जुड़ाव

भैया अर्चित आनन्द ने कहा कि यह अवधारणा पूर्णतः आध्यात्मिक है, जो भगवान शिव के गुरु स्वरूप से एक-एक व्यक्ति के जुड़ाव से संबंधित है. उन्होंने कहा कि शिव के शिष्य एवं शिष्याये अपने सभी आयोजन “शिव गुरु हैं और संसार का एक-एक व्यक्ति उनका शिष्य हो सकता है “, इसी प्रयोजन से करते हैं. “शिव गुरु हैं ” यह कथ्य बहुत पुराना है. भारत भूखंड के अधिकांश लोग इस बात को जानते हैं कि भगवान शिव गुरु हैं, आदिगुरु एवं जगतगुरु हैं. हमारे साधुओं, शास्त्रों और मनीषियों द्वारा महेश्वर शिव को आदिगुरु, परमगुरु आदि विभिन्न उपाधियों से विभूषित किया गया है.

–इन्होंने ने भी महोत्सव को किया संबोधित

कार्यक्रम में आगतों का स्वागत संदीप कुमार पाठक व मंच संचालन लक्ष्मी यादव एवं आभार ज्ञापन केशव चौधरी ने किया. कार्यक्रम में मुख्यालय रांची से आए शिव कुमार विश्वकर्मा, परमेश्वर राय के साथ साथ स्थानीय डा मदन मोहन ठाकुर, डा शर्वेश्वर ठाकुर, शत्रुघ्न साह, राकेश कुमार, सुजीत कुमार चतुवेदी, बबलू ठाकुर संजय प्रसाद, सुनील कुमार, राम पुकार, पंकज ठाकुर, भारत भूषण, मुकेश जी, विनोद जी, निलाम्बर जी, अजय श्री, ललितेश्वर कुमार, रंजीत कुमार सिंह, उर्मिला देवी, मणिकंचन ठाकुर, पूजा शरण, उमा सिंह, गीता देवी, लीलावती देवी, कृष्णा देवी, प्रेमशीला दीदी समेत अन्य वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्ति किए.

बॉक्स में

–शिव का शिष्य होने में मात्र तीन सूत्र ही सहायक है

पहला सूत्रः- अपने गुरु शिव से मन ही मन यह कहें कि “हे शिव, आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिए.

दूसरा सूत्रः- सबको सुनाना और समझाना है कि शिव गुरु हैं ताकि दूसरे लोग भी शिव को अपना गुरु बनायें.

तीसरा सूत्रः अपने गुरु शिव को मन ही मन प्रणाम करना है. इच्छा हो तो “नमः शिवाय ” मंत्र से प्रणाम किया जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: VINAY PANDEY

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >