सोनबरसा में बदलेगी सियासी तस्वीर, नए परिसीमन से 20 से बढ़कर 31 होंगी ग्राम पंचायतें

सोनबरसा प्रखंड में आगामी पंचायत चुनावों के मद्देनज़र राजनीतिक और प्रशासनिक भूगोल बदलने वाला है. नए परिसीमन के तहत ग्राम पंचायतों की संख्या 20 से बढ़कर 31 और वार्डों की संख्या 246 से 443 हो जाएगी. यह बदलाव ग्रामीण राजनीति में नए अवसरों के द्वार खोलेगा.

Panchayat Ward Reorganization: सीतामढ़ी जिले के भारत-नेपाल सीमावर्ती सोनबरसा प्रखंड का राजनीतिक और प्रशासनिक भूगोल आगामी पंचायत चुनाव से पहले पूरी तरह बदलने जा रहा है. प्रस्तावित नए परिसीमन के तहत प्रखंड में पंचायतों, वार्डों और पंचायत समिति क्षेत्रों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की रूपरेखा तैयार की गई है. नए प्रारूप के लागू होने के बाद वर्षों पुराने चुनावी समीकरण बदलेंगे और कई गांवों की प्रशासनिक पहचान भी नए सिरे से तय होगी.

20 से 31 होंगी पंचायतें, वार्ड भी बढ़कर 443 होंगे

वर्तमान समय में सोनबरसा प्रखंड में कुल 20 ग्राम पंचायतें, 29 पंचायत समिति क्षेत्र, 246 वार्ड और 3 जिला परिषद क्षेत्र मौजूद हैं. नए परिसीमन प्रस्ताव के अनुसार अब यहां 31 ग्राम पंचायतें होंगी. इसके साथ ही पंचायत समिति क्षेत्रों की संख्या 29 से बढ़कर 41 हो जाएगी. वार्डों की संख्या में सबसे बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा, जो 246 से बढ़कर सीधे 443 पहुंच जाएगी. वहीं जिला परिषद क्षेत्रों की संख्या भी 3 से बढ़ाकर 5 करने का प्रस्ताव भेजा गया है.

2011 की जनगणना के आधार पर तैयार हुआ प्रारूप

प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) मृत्युंजय कुमार ने बताया कि नया परिसीमन प्रारूप वर्ष 2011 की आधिकारिक जनगणना के आधार पर तैयार किया जा रहा है. वर्ष 2011 की गणना के अनुसार प्रखंड की कुल आबादी 2 लाख 51 हजार 448 थी. इसी जनसंख्या को मानक मानते हुए करीब 7 से 8 हजार की आबादी पर एक नई पंचायत गठित करने का खाका तैयार किया गया है.

ग्रामीण राजनीति में नए चेहरों को मिलेगा मौका

परिसीमन का सबसे सीधा प्रभाव ग्रामीण राजनीति और चुनावी गणित पर पड़ेगा. कई पुराने वार्ड टूटकर नई पंचायतों में शामिल होंगे, जिससे मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति और वार्ड सदस्यों के पारंपरिक वोट बैंक बिखरेंगे. कई दिग्गजों के चुनावी क्षेत्र बदलेंगे, जिससे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में युवा और नए प्रत्याशियों के लिए जीत के नए अवसर पैदा होंगे.

अधिसूचना पर टिकी निगाहें, दावेदारों में मची हलचल

परिसीमन की सरगर्मी शुरू होते ही गांव-गांव में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं. संभावित प्रत्याशी अपने-अपने गांवों की सीमा तय होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हालांकि प्रशासन की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि कौन सा गांव किस नई पंचायत का हिस्सा बनेगा.

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लेखक के बारे में

By राकेश कुमार राज

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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