Sitamarhi News: मानसून के आगमन से पहले सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर जल संसाधन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण इस बार भी करोड़ों की आबादी पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. समय रहते तटबंधों की मरम्मत और सुरक्षा कार्य न होने से नाराज ग्रामीण अब विभाग की उदासीनता के खिलाफ आंदोलन करने का मन बना रहे हैं.
पिछले साल ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे तटबंध
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में जल संसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई थी. बाढ़ के दौरान बागमती नदी का तटबंध ताश के पत्तों की तरह धराशाई हो गया था. रुन्नीसैदपुर, बेलसंड और शिवहर के तरियानी क्षेत्र में कुल चार स्थानों पर तटबंध टूट गए थे. इसके कारण बड़े पैमाने पर तबाही मची थी, हजारों लोग प्रभावित हुए थे और कई गांवों को दिनों तक जलमग्न रहना पड़ा था.
‘भगवान भरोसे’ सुरक्षा, ग्रामीण बोले- फिर मचेगी तबाही
वर्तमान में रुन्नीसैदपुर और बेलसंड समेत कई इलाकों में तटबंधों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर ‘रेन कट’ (बारिश से कटना) के कारण तटबंध बेहद कमजोर हो चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. स्थानीय लोगों के मुताबिक तटबंधों को पूरी तरह ‘भगवान भरोसे’ छोड़ दिया गया है, जिससे मानसून से पहले ही लोगों में डर का माहौल है.
प्रशासन का दावा: हम पूरी तरह अलर्ट
दूसरी तरफ, सीतामढ़ी के जिलाधिकारी (डीएम) रिची पांडे का दावा है कि जिला प्रशासन संभावित बाढ़ और मानसून को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में है. अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां और पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं.
सीतामढ़ी से अमिताभ कुमार की रिपोर्ट
