विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में चौथे दिन भी काली पट्टी बांध प्रदर्शन

सीतामढ़ी के अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गया है. चौथे दिन शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया. आगे 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश और विशाल प्रदर्शन की योजना है.

Sitamarhi News: राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में सीतामढ़ी जिले के अंगीभूत महाविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. शनिवार को लगातार चौथे दिन कॉलेजों में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया. बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (बूटा) के बैनर तले एसएलके कॉलेज, आरएसएस साइंस कॉलेज और एसआरके गोयनका कॉलेज समेत सभी पांचों अंगीभूत कॉलेजों में कर्मियों ने कार्य पर रहते हुए कड़ा प्रतिवाद किया.

10 अगस्त को सामूहिक अवकाश और प्रदर्शन

आंदोलन के तहत 8 अगस्त तक काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. इसके बाद 10 अगस्त को सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और विश्वविद्यालय मुख्यालय पर विशाल प्रदर्शन करेंगे. इसके साथ ही 11 से 25 अगस्त तक कार्यस्थल पर 'घंटी बजाओ अभियान' चलाया जाएगा. वहीं 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.

उच्च शिक्षा की स्वायत्तता पर हमले का आरोप

एसएलके कॉलेज में बूटा के सचिव डॉ. सुशांत शेखर एवं डॉ. ललन कुमार ने कहा कि प्रस्तावित अधिनियम उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक काला कानून है. इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की स्वायत्तता तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता बुरी तरह प्रभावित होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस अधिनियम को वापस नहीं लिया जाता, तब तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा.

विभिन्न कॉलेजों में एकजुट हुए कर्मी

शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ई. अभिषेक रंजन ने इस आंदोलन को उच्च शिक्षा की प्रतिष्ठा और शिक्षकों के सम्मान की लड़ाई बताया. डॉ. चंद्रभूषण और प्रो. दीपक कुमार ने भी कानून वापसी तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया. इसके अलावा गोयनका कॉलेज, आरएसएस महिला कॉलेज, जगन्नाथ सिंह कॉलेज चंदौली और बेलसंड कॉलेज में भी शिक्षकों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रतिकांत झा

रतिकांत पिछले करीब 17 वर्षों से पत्रकारिता में निरंतर कार्यरत हैं. उन्हें राजनीति, धर्म-अध्यात्म, पर्व-त्योहार, अपराध, सामाजिक सरोकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं जैसे बहुआयामी विषयों पर लगातार सटीक रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव प्राप्त है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >