sitamarhi news: जयकारे के साथ खुला मां दुर्गा का पट, दर्शन को लगी श्रद्धालुओं की भीड़

वासंतिक नवरात्र के सप्तमी तिथि शुक्रवार को मां भगवती दुर्गा की सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना वैदिक रीति से शोडषोपचार पद्धति से किया गया.

पुपरी. वासंतिक नवरात्र के सप्तमी तिथि शुक्रवार को मां भगवती दुर्गा की सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना वैदिक रीति से शोडषोपचार पद्धति से किया गया. पंडित अंबिका दत्त झा, शक्तिनाथ पाठक व रामकृष्ण झा ने बताया कि भगवती दुर्गा की सातवीं स्वरूप देखने में काफी भयानक है. प्रतिमा को देखते ही लोग भयभीत हो जाते हैं. परंतु वे शुभ फल देने वाली है. उनका एक नाम शुभंकरी भी है. ये दुष्टों को नाश करने वाली है. भूत, प्रेत आदि इनके नाम से ही भयाक्रांत होकर भाग जाते हैं. इनका आराधना एकाग्रचित होकर “करालरूपा कालाब्ज समानाकृति विग्रहा, कालरात्रिः शुभं दधाद्देवी चंडाट्टहासिनी ” मंत्र से ध्यान करना चाहिए. इधर, सप्तमी तिथि शुक्रवार को मां भगवती दुर्गा की पट खुलते ही दर्शनार्थ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालु भक्तों ने मां भगवती दुर्गा की जयकारा लगाकर मां की दर्शन व पूजन किया. पट खुलते ही मां भगवती दुर्गा की खोइच्छा भरने के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी. पूरा इलाका मां शक्ति के भक्ति में लीन हो गया है. पूजा पंडालों से ध्वनि विस्तारक यंत्रों के द्वारा प्रवाहित किये जा रहे भक्तिमय संगीत, दुर्गा सप्तशती की पाठ से सारा इलाका गुंजायमान हो रहा है. पूजा स्थल के आसपास मेला जैसा माहौल कायम हो गया है. शहर व गांव के विभिन्न मुहल्लों से झुंड के झुंड श्रद्धालु भक्तों की भीड़ मां के दर्शनार्थ उमड़ी रही है. सुरक्षा व विधि व्यवस्था की दृष्टिकोण से पूजा समिति सदस्यों व पुलिस प्रशासन मुस्तैद दिखें. प्रखंड क्षेत्र में कुल नौ स्थानों पर मां की प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है.

रीगा. प्रखंड क्षेत्र के रेवासी टोले धनुषी महारानी स्थान परिसर में गत वर्षों की तरह इस बार भी धूमधाम से बसंत नवरात्र दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में पूजा का आयोजन किया गया है. शुक्रवार को सप्तमी तिथि पर आचार्य चंचल मिश्रा के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माता रानी कर पट खोला गया. इसके बाद से हीं दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी. माता के जयकारे से आसपास का माहौल भक्तिमय हो गया. पूजा के सफल संचालन में पूजा समिति के सचिव इंद्रदेव सहनी, संयोजक सुभाष झा, अध्यक्ष गोवर्धन सहनी, मुरारी कुमार, ललित झा, सनोज कुमार, गुड्डू कुमार, जय मंगल सहनी व सोनेलाल सहनी का सराहनीय योगदान रहा.

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Author: VINAY PANDEY

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