Sitamarhi News: कला-संगम एवं पं. चंद्रशेखर धर शुक्ल साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को डुमरा प्रखंड के तलखापुर में साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् मो. अनीसुर्रह रहमान ने की, जबकि संचालन गीतकार गीतेश ने किया. कार्यक्रम में साहित्य, हिंदी दिवस और आगामी साहित्यिक गतिविधियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई.
Dumra News: डॉ. अमित कुमार मिश्रा ने संस्थान को भेंट की पुस्तकें
मुख्य अतिथि एचएस कॉलेज, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) के हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. अमित कुमार मिश्रा ने अपनी पुस्तक "जूतों के दौर में पांव" एवं "एक सन्नाटा छोड़ जाऊंगा" संस्थान को भेंट की. उन्होंने कहा कि साहित्य के बिना जीवन में लालित्य संभव नहीं है और साहित्य की रोशनी फैलाने के लिए सभी को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए.
हिंदी दिवस पर साहित्यिक गतिविधियों की बनी रूपरेखा
वक्ताओं ने आगामी हिंदी दिवस एवं हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित होने वाली साहित्यिक गतिविधियों पर विचार-विमर्श किया. उन्होंने सरकारी एवं निजी विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में कविता, निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित कर चयनित विद्यार्थियों को संस्थान की ओर से सम्मानित करने का सुझाव दिया. उनका मानना था कि इससे बच्चों में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ेगी.
कवि गोष्ठी में गूंजे गीत और कविताएं
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. इसकी शुरुआत गीतकार गीतेश की रचना "जमकर आज सावन छलका है, लग रहा मन अब हल्का-हल्का है" से हुई. इसके बाद सुरेश लाल कर्ण ने "बदरिया धीरे बरसो न, आज के दिन मोरा पियवा अइहें, कैली सगुनवा न" गीत प्रस्तुत कर माहौल को भावपूर्ण बना दिया. वहीं डॉ. अमित कुमार मिश्रा की कविता "सफर जितना भी मुश्किल हो, साथ बहारें भी तो हैं, इस अंधेरी रात में, टिमटिमाते तारे भी तो हैं" को भी श्रोताओं ने खूब सराहा.
कई शिक्षाविद् और समाजसेवी रहे मौजूद
कार्यक्रम में शिक्षाविद् बिट्टू विश्वास, सेवानिवृत्त प्रखंड कृषि पदाधिकारी सूर्य मोहन झा, समाजसेवी शैलेंद्र कुमार खिरहर सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे. सभी ने साहित्यिक गतिविधियों को समाज में निरंतर बढ़ावा देने पर जोर दिया.
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