Sitamarhi News: सीतामढ़ी. अधवारा नदी बेसिन की झीम, जमुरा और बांके नदियों के किनारे तटबंध निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना में विभागीय लापरवाही का मामला सामने आया है. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की लेखापरीक्षा के अनुसार आवश्यक भूमि अधिग्रहण पूरा किए बिना ही करीब 39.82 करोड़ रुपये का अनुबंध कर लिया गया. नतीजतन 53.77 किमी तटबंध निर्माण के लक्ष्य के मुकाबले दिसंबर 2024 तक सिर्फ 19.74 किमी काम पूरा हो सका और 22 जगह तटबंधों के बीच गैप रह गए.
दो साल तक शुरू नहीं हो सका निर्माण कार्य
राज्य सरकार ने अगस्त 2010 में इस योजना को प्रशासनिक स्वीकृति दी थी. इसका उद्देश्य 5.26 लाख आबादी और 17,400 हेक्टेयर कृषि भूमि को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करना था. इसके लिए 360.48 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना था.
बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी ने मार्च 2011 में मेसर्स जीएच रेड्डी एंड एसोसिएट्स के साथ 39.82 करोड़ रुपये का अनुबंध किया. कार्य मार्च 2012 तक पूरा होना था, लेकिन अनुबंध से पहले आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई. इसके कारण संवेदक करीब दो वर्षों तक निर्माण शुरू नहीं कर सका.
37 प्रतिशत काम के बाद भी 22 जगह रह गए गैप
मार्च 2013 में आंशिक भूमि उपलब्ध होने के बाद निर्माण शुरू हुआ, लेकिन मार्च 2017 में 19.74 किमी निर्माण के बाद फिर काम बंद हो गया.
लेखापरीक्षा के अनुसार झीम नदी के बाएं किनारे 21.60 किमी में 5.23 किमी और दाएं किनारे 20.88 किमी में 8.80 किमी तटबंध का निर्माण हुआ. जमुरा नदी के दोनों किनारों पर क्रमशः 1.62 और 3.26 किमी तथा बांके नदी के बाएं किनारे 0.83 किमी तटबंध बनाया गया. बांके के दाएं किनारे एक किलोमीटर हिस्से में कोई निर्माण नहीं हुआ.
86.11 करोड़ खर्च, फिर भी बाढ़ सुरक्षा अधूरी
नवंबर 2024 तक भूमि अधिग्रहण पर 57.14 करोड़ रुपये और संवेदक को किए गए कार्य के लिए 28.97 करोड़ रुपये समेत कुल 86.11 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे.
इसके बावजूद तटबंधों के बीच कई जगह गैप बने रहने से बाढ़ सुरक्षा का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो सका. कैग ने संवेदक को किए गए 28.97 करोड़ रुपये के भुगतान को लेखापरीक्षा में निष्फल व्यय माना है.
भूमि की कमी और पुराने अनुबंध से बढ़ी समस्या
लेखापरीक्षा के अनुसार भूमि की अनुपलब्धता के कारण तटबंधों का निर्माण टुकड़ों में हुआ. बाद में पुराने अनुबंध की दरों पर काम करने में संवेदक की अनिच्छा के कारण नवंबर 2024 में अनुबंध समाप्त कर दिया गया.
इससे योजना का काम आगे नहीं बढ़ सका और बाढ़ से सुरक्षा का उद्देश्य अधूरा रह गया.
तटबंध आंदोलन से जुड़े लोगों ने उठाए सवाल
तटबंध आंदोलन से जुड़े समाजसेवी डॉ. राजीव रंजन उर्फ गोपाल चौधरी और शशि शेखर सिंह के अनुसार, कैग की लेखापरीक्षा में सामने आए तथ्यों से योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही स्पष्ट होती है. उनका कहना है कि बाढ़ प्रभावित आबादी और कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए अधूरे तटबंधों को जल्द पूरा किया जाना जरूरी है.
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