श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव: मिथिलांचल सहित सीतामढ़ी जिले में भगवान श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है. शुक्रवार को पूरे जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है. धार्मिक दृष्टिकोण से इस वर्ष का जन्मोत्सव अत्यंत खास और फलदायी माना जा रहा है, क्योंकि करीब 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ दुर्लभ महासंयोग बन रहा है. इस दिव्य योग के कारण व्रत उपवास और जन्मोत्सव दोनों धार्मिक अनुष्ठान एक ही दिन संपन्न हो रहे हैं.
निशिता काल में रात 11:57 से 12:43 बजे तक मुख्य पूजा
पंडित मुकेश कुमार मिश्र के अनुसार, मिथिला पंचांग में चार सितंबर को अष्टमी तिथि प्रभावी रहने के साथ ही रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग भी प्राप्त हो रहा है.
- भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मुख्य पूजन निशिता काल में रात 11:57 बजे से लेकर 12:43 बजे तक संपन्न कराया जाएगा.
- इस शुभ मुहूर्त में शहर व ग्रामीण इलाकों के मंदिरों में विशेष महाभिषेक, पूजन, महाआरती और झूला दर्शन के भव्य आयोजन होंगे.
- श्रद्धालु दिनभर निर्जला व फलाहार उपवास रखकर मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य के साक्षी बनेंगे.
सज गए मंदिर, बाजारों में बढ़ी रौनक
जन्माष्टमी को लेकर शहर के प्रमुख श्री राधाकृष्ण मंदिर, बाल गोपाल मंदिर सहित इस्कॉन शाखा और तमाम देवालयों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है.
- मूर्तिकार भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं.
- बाजारों में पूजन सामग्री, पालना, मोरपंख मुकुट, बांसुरी और पोशाक की जमकर खरीदारी हो रही है.
कल मचेगी दही हांडी और मटका फोड़ की धूम
जन्माष्टमी के अगले दिन 5 सितंबर को विभिन्न क्षेत्रों में दही हांडी और मटका फोड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. कई गांवों में पारंपरिक मेले, झांकियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतिमा विसर्जन संपन्न होगा. पूरे क्षेत्र में गूंज रहे भजन-कीर्तन से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है.
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