Sitamarhi News: सीतामढ़ी के डुमरा स्थित अंबेडकर स्थल पर शुक्रवार को अल्पसंख्यक एकता मंच की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित की गई. जिला अध्यक्ष मो. मुर्तुजा की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में अल्पसंख्यक छात्रावास के लंबित निर्माण और मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज में हो रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया. प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला समाहर्ता को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा.
25 वर्षों से अटका अल्पसंख्यक छात्रावास का निर्माण
मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. तनवीर अहमद ने कहा कि अल्पसंख्यक छात्रावास निर्माण की घोषणा और शिलान्यास हुए करीब 25 वर्ष बीत चुके हैं. कई बार टेंडर की प्रक्रिया भी हुई, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है.
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद मामला जांच और कागजी प्रक्रिया में उलझा हुआ है. मंच ने छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने की मांग की.
मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज में देरी पर नाराजगी
जिला संयोजक मो. फैज उर्फ तमन्ने ने मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं होने के कारण आम लोगों को लगातार जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
मंच की ओर से ओवरब्रिज निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की गई.
दिसंबर तक निर्माण पूरा नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
अल्पसंख्यक एकता मंच ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि दिसंबर 2026 तक मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण पूरा कर उसे आम जनता को नहीं सौंपा गया, तो डीएम कार्यालय के समक्ष सैकड़ों लोग अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे.
मंच ने कहा कि आम जनता को जाम और आवागमन की समस्या से राहत दिलाने के लिए ओवरब्रिज का निर्माण समय सीमा के भीतर पूरा होना जरूरी है.
डीएम को सौंपा ज्ञापन
भूख हड़ताल के बाद मंच के प्रतिनिधिमंडल ने जिला समाहर्ता को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधियों ने लंबित छात्रावास निर्माण, मेहसौल ओवरब्रिज की देरी और गुणवत्ता से जुड़े सवालों पर प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की.
बड़ी संख्या में समर्थक रहे मौजूद
भूख हड़ताल में मो. तनवीर अहमद, मो. फैज उर्फ तमन्ने, मो. महफूज, फिरोज अंसारी, शफीउद्दीन फलाही उर्फ चांद सहित मंच के अन्य समर्थक शामिल रहे. विभिन्न संगठनों के नेताओं ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया.
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