रिंग बांध सड़क पर बीच में खड़े बिजली पोल और पेड़, डीएम के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं

सीतामढ़ी की निर्माणाधीन रिंग बांध सड़क पर बिजली के पोल और पेड़ हटाने के डीएम के निर्देश का पालन नहीं हो रहा है. सड़क निर्माण के बीचोंबीच खड़े ये अवरोध न केवल निर्माण कार्य को बाधित कर रहे हैं, बल्कि सड़क किनारे कचरे और गंदगी से स्थानीय लोगों का जीना भी दूभर हो गया है.

Sitamarhi News: शहर में निर्माणाधीन रिंग बांध सड़क पर बिजली के पोल और पेड़ हटाने के जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद बिजली विभाग और वन विभाग की सुस्ती बरकरार है. हालात यह हैं कि कई स्थानों पर पोल और पेड़ों को हटाए बिना ही सड़क का निर्माण और कालीकरण किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर सड़क किनारे कचरा और शौचालय की गंदगी फेंके जाने से स्थानीय लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

पासवान चौक के पास इसका स्पष्ट उदाहरण देखने को मिल रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गौशाला की ओर जाने वाले मार्ग पर भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है. पासवान चौक से लखनदेई पुल तक कई स्थानों पर बिजली के पोल और पेड़ अब भी सड़क के बीचोंबीच खड़े हैं.

सड़क निर्माण के साथ अधूरा है फुटपाथ का काम

निर्माणाधीन रिंग बांध सड़क पर 21 फीट चौड़ी सड़क के अलावा सात फीट चौड़े फुटपाथ का निर्माण भी होना है, लेकिन किनारों पर मिट्टी भराई का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पोल और पेड़ नहीं हटाए गए तो आगे भी सड़क के बीच अवरोध बने रहेंगे.

खुले में फेंकी जा रही शौचालय की गंदगी

स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि वार्ड संख्या 14, 15 और 16 के बीच बड़ी मात्रा में कचरा जमा है. पासवान चौक निवासी रामकुमार पासवान और संजय पासवान ने बताया कि टैंकर से शौचालय की गंदगी खुलेआम सड़क किनारे उड़ेल दी जाती है. इसके अलावा विवाह भवनों से निकलने वाला जूठन और कचरा भी रात के समय यहीं फेंक दिया जाता है.

प्रदूषण से लोगों का जीना हुआ मुश्किल

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदगी और दुर्गंध के कारण आसपास के मोहल्लों में रहना मुश्किल हो गया है. पूरबा और पछिया हवा चलने पर बदबू पूरे इलाके में फैल जाती है. लोगों को मजबूरन अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ रही हैं. उन्होंने संबंधित विभागों से अविलंब कार्रवाई कर समस्या का समाधान करने की मांग की है.


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लेखक के बारे में

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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