Sitamarhi: 25 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ शुरू होगा छठ महा-अनुष्ठान

आगामी 25 अक्टूबर, शनिवार से लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा का शुभारंभ होगा.

सीतामढ़ी. आगामी 25 अक्टूबर, शनिवार से लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा का शुभारंभ होगा. पंडित मुकेश कुमार मिश्र के अनुसार, पुत्र की रक्षा के निमित्त प्रकृति को समर्पित छठ महा-अनुष्ठान का शुभारंभ आगामी 25 अक्टूबर, शनिवार से शुरू होगा. इसको लेकर नगर निगम की ओर से 70 से अधिक जगहों पर घाटों की साफ-सफाई व बांस-बल्ली लगाने का काम शुरू हो चुका है. वहीं, जिले भर के गांव-टोलों में स्थानीय लोगों द्वारा पोखर व आम जलाशयों से जलकुंभियों की सफाई की जा रही है. बाजार में छठ से जुड़ी वस्तुओं की खरीददारी शुरू हो गयी है.

पहला दिन

पहले दिन छठ व्रती घर की साफ-सफाई करने के बाद स्नान कर तन और मन से पवित्रता धारण करते हैं. इसके बाद चने की दाल, कद्दू की सब्जी व अरबा चावल का प्रसाद बनाया जाता है. इस प्रसाद का ग्रहण कर छठ व्रति छठ महा-अनुष्ठान का व्रत संकल्प लेते हैं.

दूसरा दिन

वहीं, दूसरे दिन 26 अक्टूबर, रविवार को खरना होगा. इस दिन छठ व्रती मिट्टी के चूल्हे पर गम्हरी धान के चावल, गुड़, गन्ने का रस व अन्य प्रकार की वस्तुओं का प्रसाद बनाते हैं. शाम को विधि-विधान से खरना की पूजा की जाती है, जहां परिवार के सभी सदस्य उपस्थित होते हैं. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ छठ व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ करते हैं. 36 घंटे के इस उपवास के दौरान छठ व्रती पानी की एक बूंद तक नहीं लेते हैं.

तीसरा दिन

वहीं, 27 अक्टूबर, सोमवार को चार दिवसीय छठ महा-अनुष्ठान का तीसरा दिन रहेगा. इस दिन सुबह से ही लोग छठ घाटों को सजाने-संवारने के काम में लग जायेंगे. महिलायें छठी मैया व सूर्यदेव के निमित्त प्रसाद के रूप में एक से बढ़कर एक पकवान बनाने में जुटी रहेंगी. घर के पुरुष गन्ना, फल, मिठाइयां व छठ पूजा में उपयोग की जाने वाली अन्य वस्तुओं के इंतजाम में जुटे रहेंगे. दोपहर बाद तमाम छठ घाटों पर छठ व्रती अपने परिवार के सदस्यों संग पहुंचकर सूर्योपासना करेंगे. विधि-विधान से अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देंगे. इसके बाद छठ व्रती डाला डाला के साथ रात भर छठ घाट पर छठी मैया के पारंपरिक गीत गाते हुए रात गुजारेंगे.

चौथा दिन

28 अक्टूबर, मंगलवार को छठ महापर्व का चौथा दिन रहेगा. इस दिन चार बजे भोर से ही छठी मैया व सूर्यदेव की आराधना शुरू होगी. छठ व्रती पानी के खड़े रहकर सूर्योदय का इंतजार करेंगे और सूर्य के दर्शन होते ही भगवान सूर्यदेव को अर्घ अर्पित करेंगे. इसके बाद कई विधियों से गुजरने के बाद छठ व्रती पारण संग चार दिवसीय छठ महा-अनुष्ठान का समापन करेंगे.

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Author: RANJEET THAKUR

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