सीतामढ़ी में कागजों पर दौड़ रहा ”रिंग बांध” का उद्धार, डीएम की फटकार के बाद भी सुस्त पड़ा बुडको

सीतामढ़ी शहरवासियों का ढाई दशक पुराना सपना 'रिंग बांध जीर्णोद्धार' विभागीय सुस्ती की भेंट चढ़ गया है.

By VINAY PANDEY | January 15, 2026 9:54 PM

सीतामढ़ी शहरवासियों का ढाई दशक पुराना सपना ”रिंग बांध जीर्णोद्धार” विभागीय सुस्ती की भेंट चढ़ गया है. करीब 15 लाख की भारी-भरकम लागत से रिंग बांध के चौड़ीकरण और कालीकरण की योजना धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही है. डीएम रिची पांडेय के सख्त निर्देश और फटकार के बावजूद जनवरी का आधा महीना बीत जाने पर भी काम शुरू नहीं हो सका है.

ढाई दशक पुरानी समस्या, फिर भी अधिकारियों का टाल-मटोल

शहर के पुराना पोस्टमार्टम हाउस से पासवान चौक और गणिनाथ मंदिर होते हुए अंबेडकर चौक तक रिंग बांध का कायाकल्प होना है. योजना के मुताबिक, संपूर्ण रिंग बांध का 20 फीट चौड़ीकरण और कालीकरण किया जाना है. इसके साथ ही कपरौल गुमटी से लेकर अंबेडकर प्रतिमा स्थल तक के हिस्से के लिए भी करीब 7 लाख रुपये का प्रावधान है. निर्माण की जिम्मेदारी बुडको (BUIDCO) को सौंपी गई है, लेकिन पिछले एक साल से केवल तारीखें ही मिल रही हैं.

दिसंबर की डेडलाइन फेल, धूल फांक रहे शहरवासी

पिछले वर्ष नवंबर में जिलाधिकारी रिची पांडेय ने खुद मौके का निरीक्षण किया था. उन्होंने जर्जर स्थिति को देखते हुए बुडको अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी और 1 दिसंबर से हर हाल में काम शुरू करने का अल्टीमेटम दिया था. विडंबना यह है कि दिसंबर खत्म होकर जनवरी भी बीतने को है, लेकिन निर्माण कार्य अभी भी अधर में लटका है.

इस लेती-लतीफी का खामियाजा पटना, मुजफ्फरपुर, शिवहर और मोतिहारी जैसे शहरों से आने वाले यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय दुकानदार और राहगीर भुगत रहे हैं. जर्जर बांध पर वाहनों के चलने से उड़ने वाली धूल ने व्यवसायी वर्ग और आम परिवारों का जीना मुहाल कर दिया है.

कार्य लोकल एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा

परियोजना में हो रही देरी पर बुडको के कार्यपालक अभियंता ई. अशोक सिन्हा का कहना है कि कार्य लोकल एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि ”कब्बु खिरहर” नामक एजेंसी को प्रस्ताव भेजा गया है. विभाग को उम्मीद है कि जवाब आने के बाद अगले सप्ताह से प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. हालांकि, स्थानीय लोगों में इस टाल-मटोल को लेकर भारी आक्रोश है.

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