Sitamarhi News: बागमती नदी में छठी बार आए उफान के बाद फिलहाल पानी शांत हो गया है, लेकिन सुप्पी प्रखंड के जमला गांव में कटाव का खतरा बना हुआ है. नदी की तेज धारा से पांच घरों का कुछ हिस्सा कटकर नदी में समा चुका है. घरों के बचे हिस्से को बचाने के लिए बागमती प्रमंडल की ओर से मरम्मत कार्य कराया जा रहा है, जबकि ग्रामीणों ने स्थायी समाधान और पुनर्वास की मांग उठाई है.
बागमती के कटाव से पांच घरों पर संकट
जमला गांव में रामबाबू राय, नागेंद्र राय, रामबहादुर राय, गणेश राय और जवाहर साह के घर नदी के कटाव की जद में हैं. नदी की तेज धारा के कारण इन घरों का कुछ हिस्सा पहले ही कटकर नदी में चला गया है. अब ग्रामीणों और विभाग की चिंता घरों के शेष हिस्से को बचाने की है.
पिचिंग धंसने से बढ़ी परेशानी
ग्रामीण विकास यादव ने बताया कि उक्त घरों के समीप बोल्डर डालकर पिचिंग का कार्य कराया गया था, लेकिन वह धंस गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि पिचिंग के लिए जिस गहराई तक मिट्टी की खुदाई कर जाल बिछाकर बोल्डर डालना चाहिए था, उतनी गहराई नहीं की गई. इसी वजह से पिचिंग के धंसने की समस्या सामने आई है.
बोरे में मिट्टी डालकर घर बचाने की कोशिश
कटाव रोकने के लिए धंसे हुए पिच की जगह बोरे में मिट्टी भरकर और छोटे पेड़-पौधे रखकर अस्थायी मरम्मत की जा रही है. इसका उद्देश्य नदी की धारा को रोकना और पांचों घरों के बचे हिस्से को सुरक्षित रखना है. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है.
पुनर्वास और आवास योजना का लाभ देने की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 30-32 वर्ष पहले बागमती नदी की बाढ़ से बचाव के लिए बांध बनाया गया था. उनका कहना है कि जमला गांव के कई परिवारों को बांध और नदी के बीच के क्षेत्र में ही छोड़ दिया गया. इस दौरान कई परिवारों का पुनर्वास किया गया, लेकिन कुछ परिवार अब भी कटाव के खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों ने पूर्व में जिलाधिकारी को आवेदन देकर पुनर्वास और आवास योजना का लाभ देने की मांग की थी. अब एक बार फिर ग्रामीणों ने प्रशासन से इस दिशा में ठोस पहल करने की अपील की है.
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