सीतामढ़ी: 1968 में जमीन से निकला शिवलिंग, आज नेपाल तक के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है ये मंदिर

पुपरी के बाबा नागेश्वर नाथ महादेव मंदिर का इतिहास अनोखा है. 1968 में जमीन से शिवलिंग के प्रकट होने की घटना ने इसे धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना दिया. आज दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं.

Sitamarhi News: पुपरी. नगर स्थित बाबा नागेश्वर नाथ महादेव मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर से जुड़ी मान्यताएं और पुरानी घटनाएं इसे श्रद्धालुओं के बीच खास बनाती हैं. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार वर्ष 1968 में बच्चे मंदिर स्थल के पास गोली खेल रहे थे, तभी जमीन से अचानक शिवलिंग प्रकट हुआ. देखते ही देखते इसकी खबर पूरे क्षेत्र में फैल गयी और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी. भक्तों ने शिवलिंग का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी. बाद में सामूहिक सहयोग से यहां मंदिर का निर्माण कराया गया.

Pupri News: बच्चे खेल रहे थे, तभी जमीन से निकला शिवलिंग

स्थानीय बुजुर्ग रामस्नेही पाण्डेय, नवलकिशोर चौधरी, रघुनाथ प्रसाद, जगदीश दास और संजय कुमार के अनुसार वर्ष 1968 में बच्चे इस स्थान पर गोली खेल रहे थे. इसी दौरान जमीन से अचानक शिवलिंग दिखाई दिया.

शिवलिंग मिलने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी. श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का प्राकट्य मानकर पूजा-अर्चना और जलाभिषेक शुरू कर दिया.

सामूहिक सहयोग से बना मंदिर

शिवलिंग के प्रकट होने के बाद यहां लगातार श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया. कुछ ही महीनों में स्थानीय लोगों के सामूहिक सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया.

समय के साथ बाबा नागेश्वर नाथ महादेव मंदिर की प्रसिद्धि पुपरी से निकलकर आसपास के क्षेत्रों और नेपाल तक पहुंच गयी. आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.

पीपल के पेड़ से बहती थी दूध की धारा

निर्माणाधीन मंदिर

मंदिर के पुजारी प्रेम शंकर झा बताते हैं कि मंदिर के शुरुआती दिनों में शिवलिंग के बगल में स्थित पीपल के पेड़ से लगातार दूध की धाराएं शिवलिंग पर बहने की मान्यता रही है.

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में नाग-नागिन का जोड़ा भी दिखाई देता था. श्रद्धालुओं के बीच इसे भगवान शिव से जुड़ी आस्था के रूप में देखा जाता रहा है.

सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर में सावन की सोमवारी, बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि और नागपंचमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना होती है.

इन पर्वों पर मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहता है और हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. नेपाल समेत अन्य राज्यों से भी भक्त यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए आते हैं.

अंतिम सोमवारी पर विशेष तैयारी

सावन मास की अंतिम सोमवारी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ होने की संभावना है. इसे देखते हुए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के सदस्य व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तरह तत्पर हैं.

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुचारू व्यवस्था के लिए मंदिर परिसर में आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं.


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By Baidnath thakur

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