चकौती में दी गयी 600 बकरे की बली

चकौती में दी गयी 600 बकरे की बलीबोखड़ा. प्रखंड अंतर्गत मां दुर्गा स्थान, चकौती के पास गुरुवार को 600 बकरे की बलि दी गयी. खास बात यह कि एक ही सेवक ने सभी बकरे का बलि चढ़ायी. उक्त सेवक के स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल टीम की व्यवस्था थी. हर दो घंटे पर उसे दवा […]

चकौती में दी गयी 600 बकरे की बलीबोखड़ा. प्रखंड अंतर्गत मां दुर्गा स्थान, चकौती के पास गुरुवार को 600 बकरे की बलि दी गयी. खास बात यह कि एक ही सेवक ने सभी बकरे का बलि चढ़ायी. उक्त सेवक के स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल टीम की व्यवस्था थी. हर दो घंटे पर उसे दवा व इंजेक्शन दिया जाता था. बताया गया है कि मां दुर्गा जिसकी मन्नत पूरी करती हैं, वह व्यक्ति मां के समक्ष बकरे की बलि चढ़ाता है. पूजा समिति के अध्यक्ष चंद्रमोहन ठाकुर व प्रणव झा ने बताया कि यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है, बावजूद मां की कृपा से कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती है. वैसे अधिकारी भी यहां मौजूद रहते हैं. बताया कि यहां पर अंग्रेजों के जमाने से ही बलि चढ़ती आ रही है. इधर, खड़का दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष प्रेमकांत झा व सचिव अविनाश चंद्र झा ने बताया कि पूजा, मेला, मनोरंजन व प्रतिमा विसर्जन में स्थानीय युवकों का अपेक्षित सहयोग मिला. बिना प्रशासन के सब कुछ शांति पूर्ण संपन्न हो गया जो प्रखंड में एक मिसाल के रूप में है. फोटो-2 गहबर परिसर में सेवक व महिलाएं यहां भूत-प्रेत से मिलती मुक्ति बोखड़ा. प्रखंड के खड़का गांव के जलपा माई के यहां अष्टमी और नवमी के दिन आने -वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है. कहा जाता है कि भूत-प्रेत से मुक्ति पाने के लिए महिलाएं और पुरुष यहां आते हैं. जलपा माई के सेवक प्रमोद राउत व जगदीश सहनी श्रद्धालुओं को फूल व भस्म देते हैं. इसी से कल्याण हो जाता है. यहां बकरे का बलि भी चढ़ाया जाता है. खास बात यह कि गहबर परिसर के बाहर बकरे का मीट नहीं ले जाया जाता है. यहीं पर बना कर प्रसाद के रूप में खाया जाता है.

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