26 करोड़ मनरेगा मजदूरों के लिए बिहार के सीतामढ़ी सामूहिक उपवास

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में प्रस्तावित बदलाव और योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में देशभर में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है. इसी कड़ी में बिहार के सीतामढ़ी जिले में कांग्रेस और सर्वोदय मंडल ने अलग-अलग स्थानों पर सामूहिक उपवास और सत्याग्रह कर केंद्र सरकार के फैसले का विरोध जताया.

By VINAY PANDEY | January 11, 2026 4:37 PM

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में प्रस्तावित बदलाव और योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में देशभर में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है. इसी कड़ी में बिहार के सीतामढ़ी जिले में कांग्रेस और सर्वोदय मंडल ने अलग-अलग स्थानों पर सामूहिक उपवास और सत्याग्रह कर केंद्र सरकार के फैसले का विरोध जताया. सीतामढ़ी. केंद्र सरकार के मनरेगा कानून में बदलाव और योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध की आंच अब बिहार के सीतामढ़ी जिले तक पहुंच गई है. रविवार को कांग्रेस की ओर से नगर के गांधी मैदान में सामूहिक उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष रकटू प्रसाद ने किया. उपवास की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई.

इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रकटू प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार 26 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात करने पर आमादा है. मनरेगा कानून में रद्दोबदल से न सिर्फ ग्राम स्वराज और पंचायती राज व्यवस्था कमजोर होगी, बल्कि महात्मा गांधी के मूल्यों और सिद्धांतों को भी गहरा नुकसान पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है और इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव मजदूर विरोधी है.

मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को बताया राष्ट्र का अपमान

इसी दिन मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में जिला सर्वोदय मंडल के तत्वावधान में नगर के खादी भंडार प्रांगण में सर्वोदयी और गांधीजनों ने एकदिवसीय सामूहिक उपवास और सत्याग्रह किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नंदकिशोर मंडल ने की. सत्याग्रह से पूर्व बापू के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गई.

वक्ताओं ने केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की और मनरेगा का स्वरूप पूर्ववत रखने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि जहां संयुक्त राष्ट्रसंघ ने महात्मा गांधी की जयंती को विश्व अहिंसा दिवस घोषित किया है और दुनिया के 100 से अधिक देशों में गांधी की मूर्तियां, 150 देशों में गांधी के नाम पर डाक टिकट और सड़कें हैं, वहीं गांधी के देश में सरकारी योजनाओं से उनका नाम हटाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. वक्ताओं ने इसे न केवल राष्ट्र का अपमान बताया, बल्कि विश्व पटल पर भारत की छवि को ठेस पहुंचाने वाला कदम भी करार दिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है