सीतामढ़ी : प्रसूता व बच्चे की मौत के बाद सदर अस्पताल छह घंटों तक आक्रोश की आग में जलता रहा. मेजरगंज थाना क्षेत्र के ननकार सिमरदह गांव निवासी नरेश पासवान की पत्नी रूबी देवी (32) व जन्म लिए बच्चे की मौत से पूरा परिवार मर्माहत था.
सुबह पुत्र के जन्मने की खबर पर नरेश जश्न की तैयारी करता, पल भर में न सिर्फ बुढ़ापे की लाठी का सपना खत्म हो गया, बल्कि जिसके सहारे जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़नी थी, उसका भी साथ छूट गया. मृतका के पति व पिता ब्रह्मदेव महतो का कहना है कि सदर अस्पताल में महिला डॉक्टर की कमी है. पिछले दो दिन से वह मरीज को लेकर भरती है, लेकिन डॉक्टर देखने तक नहीं आया.
आरोप लगाया कि इलाज में घोर लापरवाही बरती गयी है. वैसे सदर अस्पताल में इलाज में कोताही का आरोप कोई नया मामला नहीं है, इस प्रकार के आरोप मरीज के परिजन द्वारा अक्सर लगाया जाता रहा है.मृतका के परिजन के आरोप की जांच नगर थाना पुलिस कर रही है. जांच के बाद ही कुछ स्थिति स्पष्ट हो पायेगी, लेकिन प्राय: अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप मॉडल अस्पताल विकसित किये जाने की कवायद पर सवाल खड़े करता है.
पुलिस के पहुंचते ही भाग खड़े हुए उपद्रवी
लगभग मशक्कत के बाद स्थिति नियंत्रण करने के लिए नगर थाने की पुलिस सदर अस्पताल पहुंची. कर्मियों के सहयोग से आग पर काबू पाया गया. वहीं नगर इंस्पेक्टर मुकेश चंद्र कुंवर, नगर थानाध्यक्ष शशिभूषण पुलिस बल के साथ अस्पताल के प्रत्येक वार्ड की छानबीन की. पुलिस के आने की सूचना पर अस्पताल में उपद्रव मचाने वाले असामाजिक तत्व भाग खड़े हुए.
उपद्रवियों के आगे सुरक्षा प्रहरी नतमस्तक: सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेवारी जिसके कंधे पर है, वह उपद्रवियों के आगे पूरी तरह नतमस्तक बना था. प्रसूता व उसके बच्चे की मौत की खबर मिलने के बाद मृतका के मायके (मधुबन) से बड़ी संख्या में परिजन व रिश्तेदार सदर अस्पताल पहुंचकर कानून व्यवस्था को हाथ में ले लिया. महिला वार्ड के बेड से चादर व गद्दा को बाहर निकालकर उसे आग के हवाले कर दिया. उग्र स्थिति को देख वार्ड में भरती मरीजों की भी बेचैनी बढ़ने लगी. कुछ देर तक तो भागम-भाग की स्थिति बन गयी. सुरक्षा की जिम्मेवारी संभाल रहे निजी सुरक्षा गार्ड अपनी सलामती के लिए छुपते दिखे.
