40 हजार से अधिक तमिल ब्राह्मण युवकों को नहीं मिल रहा जीवनसाथी, अब बिहार में हो रही दुल्हनों की तलाश

vivah muhurat 2021 एम परमेश्वरन ने कहा कि लड़की के परिवार को शादी का पूरा खर्च उठाना पड़ता है और यह तमिल ब्राह्मण समुदाय का अभिशाप है. आभूषण, मैरिज हॉल का किराया, भोजन और उपहारों पर खर्च 12-15 लाख रुपये होता है.

तमिलनाडु के 40,000 से अधिक युवा तमिल ब्राह्मणों को राज्य के भीतर दुल्हन ढूंढ़ना मुश्किल हो रहा है. तमिलनाडु स्थित ब्राह्मण संघ ने उत्तर प्रदेश और बिहार में समुदाय से संबंधित उपयुक्त जोड़े की तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया है. थमिजनाडु ब्राह्मण एसोसिएशन (थंब्रास) के अध्यक्ष एन नारायणन ने एसोसिएशन की मासिक तमिल पत्रिका के नवंबर अंक में प्रकाशित एक खुले पत्र में कहा, ‘हमने अपने संगम की ओर से एक विशेष अभियान शुरू किया है.

मोटे अनुमानों का हवाला देते हुए नारायणन ने कहा कि 30-40 उम्र वर्ग के 40,000 से अधिक तमिल ब्राह्मण पुरुष शादी नहीं कर सके, क्योंकि वे तमिलनाडु में दुल्हन नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं. अगर तमिलनाडु में विवाह योग्य उम्र वर्ग में 10 ब्राह्मण लड़के हैं, तो इस उम्र वर्ग में छह लड़कियां उपलब्ध हैं. इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली, लखनऊ और पटना में समन्वयकों की नियुक्ति की जायेगी. हिंदी में पढ़ने, लिखने और बोलने में सक्षम व्यक्ति को यहां मुख्यालय में समन्वय के लिए नियुक्त किया जायेगा.

बेटी के विवाह में खर्च होते हैं 12-15 लाख रुपये

एम परमेश्वरन ने कहा कि लड़की के परिवार को शादी का पूरा खर्च उठाना पड़ता है और यह तमिल ब्राह्मण समुदाय का अभिशाप है. आभूषण, मैरिज हॉल का किराया, भोजन और उपहारों पर खर्च 12-15 लाख रुपये होता है. मैं ऐसे गरीब ब्राह्मण परिवारों को जानता हूं जो अपनी बेटियों की शादी के लिए धन जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

अब तमिल-तेलुगु के बीच रिश्तेदारी हो रही

दुल्हन की तलाश कर रहे एक युवक अजय ने कहा, ‘अब तमिल-तेलुगु ब्राह्मण विवाह या कन्नड़ भाषी माधवों और तमिल भाषी स्मार्तों के बीच शादियों को देखना असामान्य नहीं है. पहले भी हमने उत्तर भारतीय और तमिल ब्राह्मणों के बीच परिवार की रजामंदी से विवाह होते देखा है.’ मध्व ब्राह्मण एक वैष्णव संप्रदाय है और श्री माधवाचार्य के अनुयायी हैं.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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Published by: Prabhat khabar news desk

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