शेखपुरा के श्यामा सरोवर पार्क में पार्किंग निर्माण का कड़ा विरोध, पार्क बचाने के लिए सड़क पर उतरे लोग

Shyama Sarovar Park Protest : शेखपुरा में श्यामा सरोवर पार्क की जमीन पर सर्किट हाउस के विस्तार के लिए पार्किंग निर्माण का मामला गरमाया हुआ है. स्थानीय पर्यावरण प्रेमी और राहगीर इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने पार्क को बचाने के लिए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

Shyama Sarovar Park Protest : शेखपुरा जिले के इकलौते श्यामा सरोवर पार्क की जमीन पर सर्किट हाउस का पार्किंग निर्माण विवादों में घिर गया है. गुरुवार को स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और राहवीरों ने जिला प्रशासन के इस कदम का जमकर विरोध करते हुए नारेबाजी की.

पार्क की जमीन पर बाउंड्री वॉल का विरोध

शेखपुरा शहर के बाईपास स्थित सर्किट हाउस में पार्किंग के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है. इस विस्तार के लिए श्यामा सरोवर पार्क की कीमती जमीन को घेरकर बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है. मौके पर मौजूद लोजपा नेता सचिन सौरभ, राहवीर अरुण कुमार और सनोज पासवान सहित कई समाजसेवियों ने इस निर्माण पर कड़ी आपत्ति जताई है.

पौधारोपण वाली जगह पर चला बुलडोजर

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि महज 15 दिन पहले पर्यावरण दिवस के अवसर पर इसी जमीन पर दर्जनों पौधे लगाए गए थे. उस दिन सभी ने मिलकर पर्यावरण सुरक्षा की शपथ भी ली थी. अब उसी जगह पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर पार्क को नष्ट किया जा रहा है जो पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है.

वरीय नेताओं और अधिकारियों को दी गई सूचना

इस गंभीर मामले की जानकारी प्रभारी मंत्री श्वेता गुप्ता और डीएम शेखर आनंद को दे दी गई है. इसके साथ ही जमुई सांसद अरुण भारती और शेखपुरा विधायक रणधीर कुमार सोनी को भी इससे अवगत कराया गया है. समाजसेवियों ने प्रशासन से यह योजना अविलंब रोकने की मांग की है.

वन विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों ने वन विभाग के ढुलमुल रवैये पर भी गहरी नाराजगी जाहिर की है. लोगों का कहना है कि करीब पांच साल पहले नगर परिषद ने यह पार्क वन विभाग को सौंप दिया था. इसके बावजूद विभाग इस निर्माण कार्य पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है और प्रशासनिक तानाशाही के तहत बिना एनओसी के काम हो रहा है.

रेंजर का बयान और वर्तमान स्थिति

इस विवाद पर रेंजर सुनील कुमार ने स्पष्ट किया है कि श्यामा सरोवर पार्क वन विभाग को अधिसूचित नहीं है. इसलिए इस निर्माण के लिए किसी एनओसी की आवश्यकता भी नहीं है. हालांकि वन विभाग ने हाल ही में यहां लाखों रुपये की लागत से शौचालय, पेयजल और सौंदर्यीकरण का काम कराया था. फिलहाल प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच इस निर्माण को लेकर गतिरोध लगातार बना हुआ है.

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Author: Ranjeet kumar

Published by: Sakshi Kumari

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