Sheikhpura News: बिहार के माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड अंतर्गत सामस बुजुर्ग पंचायत के ऐतिहासिक दौरे पर पहुंच रहे हैं. पंचायत की सीमा में कदम रखते ही मुख्यमंत्री सबसे पहले क्षेत्र के प्रसिद्ध और प्राचीन सामस विष्णु धाम मंदिर जाकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करेंगे और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे. धार्मिक अनुष्ठान के तुरंत बाद मुख्यमंत्री पंचायत के नवनिर्मित सरकारी भवन में आयोजित होने वाले विशेष ‘सहयोग शिविर’ में मुख्य रूप से शिरकत करेंगे. इस उच्चस्तरीय सहयोग शिविर में विभिन्न सरकारी विभागों के स्टॉल लगाए गए हैं, जहां आम जनता की प्रशासनिक व स्थानीय समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट (त्वरित) समाधान किया जाएगा.
डीएम शेखर आनंद और एसपी बलीराम चौधरी ने संभाली कमान, तैनात किए गए दंडाधिकारी
मुख्यमंत्री के इस अति महत्वपूर्ण आगमन को लेकर शेखपुरा जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं. सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए सोमवार को जिलाधिकारी (DM) शेखर आनंद और पुलिस अधीक्षक (SP) बलीराम चौधरी ने संयुक्त रूप से बैठक की. समाहरणालय में आयोजित इस बैठक में प्रतिनियुक्त सभी दंडाधिकारियों (Magistrates) और पुलिस पदाधिकारियों को सुरक्षा खाका समझाते हुए ब्रीफ किया गया. डीएम ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के आगमन के निर्धारित समय से काफी पूर्व सभी सुरक्षा बल और मजिस्ट्रेट अपने-अपने चिह्नित ड्यूटी स्थलों पर मुस्तैद हो जाएं.
सूबे में सीएम भले बदले हों, विकास का ढर्रा वही है: विधायक रणधीर सोनी
व्यवस्थाओं और जनसभा स्थल का जायजा लेने के लिए शेखपुरा के जदयू विधायक रणधीर कुमार सोनी और बरबीघा के जदयू विधायक डॉ. कुमार पुष्पांजय पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. मीडियाकर्मियों से रूबरू होते हुए पूर्व मंत्री व विधायक रणधीर कुमार सोनी ने विपक्ष पर सियासी चुटकी लेते हुए कहा कि भले ही सूबे में मुख्यमंत्री का चेहरा बदल गया हो, लेकिन एनडीए (NDA) गठबंधन के शासनकाल में विकास का मूल ढर्रा और गति वही है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी विकास पुरुष नीतीश कुमार के पदचिह्नों पर चलते हुए बिहार को विकास की एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयासरत हैं.
₹15 करोड़ से संवर रहा है विष्णु धाम परिसर, पर्यटक स्थल घोषित करने की उठेगी मांग
सामस विष्णु धाम को अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय पर्यटक स्थल के रूप में नोटिफाई (विकसित) करवाने के सवाल पर स्थानीय बरबीघा विधायक डॉ. कुमार पुष्पांजय ने कहा कि यह प्राचीन मंदिर पूरे शाहाबाद और मगध क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है. उन्होंने घोषणा की कि समस्त जिलेवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वे स्वयं मुख्यमंत्री के समक्ष इस पावन स्थल को आधिकारिक पर्यटक स्थल का दर्जा देने की पुरजोर मांग लिखित रूप से उठाएंगे.
विधायक ने विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 15 करोड़ रुपये की प्राक्कलित लागत से मंदिर के आसपास के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे को विकसित करने का कार्य चल रहा है. इसके अतिरिक्त:
- पूर्व मुखिया पंकज सिंह ने बताया कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनने से पूर्व भी दो बार यहां आ चुके हैं. सीएम के रूप में उनकी यह तीसरी यात्रा मंदिर के प्रति अगाध श्रद्धा को दर्शाती है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि इसे पर्यटक स्थल घोषित करने से स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा.
- मुखिया प्रतिनिधि पिंटू पासवान ने मंदिर के निकट बड़े वाहनों के लिए आधुनिक पार्किंग स्थल बनाने तथा दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशाला व भोजन की सुदृढ़ व्यवस्था कराने की मांग प्रमुखता से उठाई है.
जिले को मिलेगी ₹45 करोड़ की विकास योजनाओं की बड़ी सौगात
प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने इस एक दिवसीय दौरे के दौरान शेखपुरा जिले को करीब 45 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न महत्वपूर्ण विकास योजनाओं, सड़कों और भवनों का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन एवं शिलान्यास कर बड़ी सौगात देंगे. सोमवार को उनके आगमन की पूर्व तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजीत प्रभाकर, जदयू के बरबीघा प्रखंड अध्यक्ष विनोद सिंह, प्रबुद्ध समाजसेवी संतोष कुमार शंकु, प्रमोद चंद्रवंशी, गुरु चरण कुमार, मुखिया प्रतिनिधि अजीत कुमार छोटू और साकेत कुमार सहित एनडीए के सैकड़ों प्रमुख कार्यकर्ताओं ने सभा स्थल का सघन निरीक्षण किया.
खुदाई का इतिहास: जानिए सामस विष्णु धाम का 1100 साल पुराना गौरवशाली इतिहास
सामस गांव का इतिहास कला और पुरातत्व के दृष्टिकोण से बेहद समृद्ध है. वर्ष 1992 में गांव के भीतर किसी निर्माण कार्य को लेकर प्रशासनिक या निजी स्तर पर खुदाई का काम चल रहा था. इसी दौरान मजदूरों की कुदाल जमीन के नीचे किसी अत्यधिक ठोस चीज से टकराई. जब कौतूहलवश आस-पास के क्षेत्र की वैज्ञानिक व सावधानीपूर्वक खुदाई की गई, तो भगवान विष्णु की यह प्राचीन और विहंगम मूर्ति धरातल पर प्रकट हो गई. काले कसौटी पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा खड़ी मुद्रा (स्थापत्य शैली) में है, जिसके चार हाथों में शंख, चक्र, गदा तथा पद्म पूरी भव्यता के साथ सुशोभित हैं.
इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, विष्णुधाम सामस की यह प्रतिमा करीब 1100 साल पुरानी है. मूर्ति की वेदी (निचले हिस्से) पर प्राचीन देवनागरी लिपि में एक विशेष अभिलेख अंकित है, जिसपर ‘ऊं उत्कीर्ण सूत्रधारसितदेव:’ खुदा हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस लिपि में आकार, इकार और ईकार की मात्राएं पूरी तरह विकसित अवस्था में हैं, जो उत्तर भारत में नौवीं शताब्दी के बाद की मूर्तिकला में देखने को मिलती हैं. यह ऐतिहासिक शैली प्रतिहार वंश के प्रतापी राजा महेंद्रपाल (891-907 ईस्वी) के ‘दिघवा-दुली दानपात्र’ में प्रयुक्त लिपि से हूबहू मेल खाती है. इस प्राचीन अभिलेख से यह भी ऐतिहासिक प्रमाणित होता है कि इस कालजयी मूर्ति को बनाने वाले मुख्य मूर्तिकार (सूत्रधार) का नाम ‘सितदेव’ था.
