शेखपुरा से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत, वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए प्राकृतिक खेती के गुरुमंत्र

Sheikhpura News: शेखपुरा के अरियरी प्रखंड अंतर्गत गोसाईमढ़ी गांव में 1 से 30 जून तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' का शुभारंभ हुआ. कृषि विज्ञान केंद्र और आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार चौधरी और उद्यान वैज्ञानिक नवीन कुमार सिंह ने किसानों को खरीफ फसलों में संतुलित खाद डालने, ढैंचा से हरित खाद बनाने और गोबर-गौमूत्र से प्राकृतिक खेती करने के तरीके बताए. मौके पर सहायक तकनीकी प्रबंधक अश्वनी कुमार सहित 30 से अधिक किसान और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.

Sheikhpura News (प्रदीप कुमार): शेखपुरा जिले के अरियरी प्रखंड अंतर्गत औंधे पंचायत के गोसाईमढ़ी गांव से मंगलवार को मिट्टी की सेहत सुधारने और कृषि को संधारणीय बनाने के उद्देश्य से एक बड़े अभियान का शंखनाद किया गया है. यहाँ 1 से 30 जून 2026 तक पूरे देश में चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी “खेत बचाओ अभियान” की विधिवत शुरुआत की गई. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), शेखपुरा एवं आत्मा (ATMA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस जिला स्तरीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का सफल संचालन गोसाईमढ़ी गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय के पुस्तकालय भवन में किया गया. इस कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पारंपरिक और कम लागत वाली खेती के कई आधुनिक गुर सिखाए.

रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों से बचें, ढैंचा से तैयार करें हरित खाद: डॉ. प्रमोद

कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, शेखपुरा के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. प्रमोद कुमार चौधरी ने एक महीने तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान की विस्तृत रूपरेखा किसानों के सामने रखी. उन्होंने खरीफ फसलों के चालू मौसम को देखते हुए किसानों से खेतों में संतुलित मात्रा में ही रासायनिक उर्वरकों (खाद) का उपयोग करने की अपील की.

डॉ. चौधरी ने मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक खादों के अत्यधिक और अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारी उपजाऊ भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच रही है. इससे बचने के लिए उन्होंने किसानों को ढैंचा की बुवाई कर खेतों में ही ‘हरित खाद’ तैयार करने की व्यावहारिक तकनीक बताई. उन्होंने जोर देकर कहा कि हरित खाद और अन्य जैविक उपायों को अपनाकर ही हम आने वाली पीढ़ी के लिए मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को सुरक्षित रख सकते हैं.

गोबर, गौमूत्र और बेसन से घर पर बनाएं प्राकृतिक खाद, घटेगी खेती की लागत

कार्यशाला में मौजूद उद्यान वैज्ञानिक नवीन कुमार सिंह ने किसानों को रसायनों से तौबा कर पूरी तरह से प्राकृतिक खेती अपनाने की महती सलाह दी. उन्होंने कहा कि आज के दौर में बाजार से महंगी खाद और कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं है. किसान अपने घर और गांव में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों जैसे, गाय के गोबर, गौमूत्र, बेसन, गुड़ और पीपल के पेड़ के नीचे की उपजाऊ मिट्टी के मिश्रण से बेहद कम लागत में बेहतरीन प्राकृतिक खाद व जीवामृत तैयार कर सकते हैं. इस पद्धति से न सिर्फ खेती की लागत आधी हो जाएगी, बल्कि फसलों का उत्पादन और गुणवत्ता भी बाजार में सबसे बेहतर मिलेगी.

कृषि विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं से रूबरू हुए किसान, जनप्रतिनिधि भी रहे मौजूद

इसी क्रम में आत्मा के सहायक तकनीकी प्रबंधक (ATM) अश्वनी कुमार ने कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न किसान हितैषी और अनुदान (सब्सिडी) आधारित योजनाओं की बिंदुवार जानकारी दी. उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, बीज ग्राम योजना और मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराने की प्रक्रिया समझाई.

इस उद्घाटन कार्यक्रम में औंधे पंचायत के स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित क्षेत्र के 30 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया और अपने खेतों को रासायनिक जहर से बचाने का सामूहिक संकल्प लिया.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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