नीतीश कुमार का वो 'सीक्रेट' सिपाही, जिसने 30 साल तक बिना लालच निभाया साथ; अब थमाया MLC का टिकट!

Sheikhpura JDU MLC Candidate: शेखपुरा के घाटकुसुम्भा टाल क्षेत्र के रहने वाले ललन प्रसाद को जदयू ने MLC प्रत्याशी घोषित किया है. 1994 समता पार्टी के दौर से नीतीश कुमार के साथ डटे रहने वाले ललन प्रसाद की पूरी कहानी पढ़ें.

Sheikhpura JDU MLC Candidate: बिहार की राजनीति से इस वक्त की एक सबसे सुखद और जमीनी कार्यकर्ता के उभार की बड़ी कहानी सामने आ रही है. जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए जैसे ही ललन प्रसाद के नाम की घोषणा की, पूरे शेखपुरा जिले और खासकर घाटकुसुम्भा के टाल इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई. बेहद सामान्य किसान परिवार से आने वाले ललन प्रसाद की पहचान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और वफादार सिपाही के रूप में होती है. राजनीति के लगभग 30 वर्षों के उतार-चढ़ाव और वक्त के थपेड़ों के बीच भी ललन ने कभी मुख्यमंत्री का साथ नहीं छोड़ा, और आज उसी निष्ठा का इनाम उन्हें मिला है.

गांव-गांव घूमने के दौरान नीतीश कुमार की नजरों में आए थे ललन

घाटकुसुम्भा प्रखंड के सुजावलपुर गांव के रहने वाले ललन प्रसाद की राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प है. जब 90 के दशक में नीतीश कुमार टाल बहुल इलाकों में गांव-गांव घूमकर लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक और गोलबंद कर रहे थे, उसी दौरान ललन प्रसाद उनके संपर्क में आए. साल 1994 में जब समता पार्टी का गठन हुआ, तब से लेकर आज तक नीतीश कुमार राजनीतिक रूप से चाहे जिस करवट रहे, ललन प्रसाद उनके साथ साये की तरह डटे रहे.

आर्थिक तंगी से बाधित हुई थी पढ़ाई, ऐसा रहा राजनीतिक सफरनामा

कालखंड / वर्षराजनीतिक पद और हासिल की गई उपलब्धि
प्रारंभिक जीवनसुजावलपुर प्राथमिक स्कूल और घाटकुसुंभा चौर स्कूल से मैट्रिक; AN कॉलेज पटना से इंटर (आगे आर्थिक तंगी से पढ़ाई रुकी).
2001 – 2005जेडीयू के सक्रिय प्रखंड अध्यक्ष (घाटकुसुंभा प्रखंड).
2001 व 2006पत्नी श्री देवी जिला परिषद सदस्य बनीं (2006 से 2011 तक जिला परिषद उपाध्यक्ष रहीं).
2009 – 2013शेखपुरा जेडीयू के जिला उपाध्यक्ष मनोनीत (वर्तमान में भी इसी पद पर सक्रिय).
2021 से अब तकघाटकुसुम्भा क्षेत्र से स्वयं जिला परिषद सदस्य निर्वाचित हुए.

अतिपिछड़ा (धानुक) समाज से आते हैं ललन, टिकट मिलने पर जनता बोली- “सराहनीय कदम”

ललन प्रसाद धानुक जाति से ताल्लुक रखते हैं, जिसे बिहार की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के अंतर्गत रखा गया है. शेखपुरा में जदयू की बुनियाद को मजबूत करने में उनका शुरुआती दिनों से ही बहुत बड़ा योगदान रहा है. टाल क्षेत्र के पिछड़ेपन की आवाज को वो लगातार उठाते रहे हैं.

ललन प्रसाद को टिकट मिलने के बाद शेखपुरा के आम लोगों और आम कार्यकर्ताओं के मुख से बस एक ही बात सुनने को मिल रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे अपने जमीनी और छोटे कार्यकर्ताओं को भूलते नहीं हैं. इस फैसले से जेडीयू के काडर वोटर्स और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त नए जोश का संचार हुआ है, जिसका सीधा असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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