शेखपुरा जिले के घाटकुसुम्भा प्रखंड स्थित बाबा नरपत मल मंदिर परिसर में गुरुवार को बिहार के अमर शहीद रामफल मंडल की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई. इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर देश की आजादी के लिए दिए गए उनके बलिदान को याद किया.
समारोह में पप्पू राज मंडल, अमीर राज मंडल, संजय कुमार, कपिल महतो, सुनील महतो, अरुण महतो, नीतीश कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
वक्ताओं द्वारा देश के लिए दिए गए योगदान और बलिदान की चर्चा
इस अवसर पर पप्पू राज मंडल ने कहा कि शहीद रामफल मंडल का जीवन देशभक्ति, साहस और त्याग की मिसाल है. युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है.
रामफल मंडल ने बेहद कम उम्र में देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. उनके बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है.
वहीं अमीर राज मंडल ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में रामफल मंडल का योगदान हमेशा याद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और संघर्ष को विद्यालयों तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचाने की जरूरत है.
रामफल मंडल का जन्म और 1942 के आंदोलन का इतिहास
गौरतलब हो कि रामफल मंडल का जन्म 6 अगस्त 1924 को सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी थाना क्षेत्र के मधुरापुर गांव में हुआ था. वे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया और 23 अगस्त 1943 को महज 19 वर्ष की उम्र में भागलपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई. अन्य वक्ताओं ने कहा कि रामफल मंडल की शहादत स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर है.
समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने और देशहित में कार्य करने का संकल्प भी लिया.
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