शेखपुरा में मानसून की बेरुखी जारी, 15 दिनों में 121.7 एमएम बारिश, धान की फसल पर खतरा

शेखपुरा जिले में मानसून की बेरुखी सितंबर में भी जारी है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. सामान्य से 40% कम बारिश और मानसून की संभावित वापसी से धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है.

शेखपुरा में मानसून की बेरुखी सितंबर महीने में भी जारी है. आसमान में बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जिले में अच्छी बारिश नहीं हो रही है. मौसम विभाग ने सप्ताहांत से मानसून की वापसी का अनुमान जताया है, ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है. पिछले दो दिनों से तेज धूप और तापमान 35 डिग्री के पार पहुंचने के बाद मंगलवार को जिले के कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन इससे गर्मी और उमस से खास राहत नहीं मिली.

सितंबर में सामान्य से काफी कम बारिश

पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार सितंबर महीने में शेखपुरा जिले में औसतन 205.2 मिलीमीटर बारिश होती रही है. इस साल सितंबर के 15 दिन बीतने के बाद अब तक सिर्फ 121.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. यानी महीने के आधे से अधिक दिन गुजरने के बावजूद बारिश सामान्य औसत से काफी पीछे है. मंगलवार को हुई हल्की बारिश भी बहुत कम रही, जिससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं पहुंच सकी.

5 सितंबर के बाद फिर कमजोर पड़ा मानसून

आधिकारिक जानकारी के अनुसार सितंबर महीने की शुरुआत में जिले में मानसून ने अच्छी रफ्तार पकड़ी थी. हालांकि 5 सितंबर के बाद बारिश एक बार फिर कमजोर पड़ गई. 10 सितंबर को जिले में औसतन 27 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद लगातार अच्छी बारिश नहीं हो सकी. पिछले दो दिनों में तेज धूप के कारण तापमान 35 डिग्री के पार पहुंच गया था.

जून से अगस्त तक भी बारिश का आंकड़ा कमजोर

इस साल मानसून के दौरान जिले में बारिश का आंकड़ा पहले से ही चिंता बढ़ाने वाला रहा है. जून महीने में शेखपुरा में मात्र 49 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी. जुलाई में सबसे ज्यादा 191 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि अगस्त में सिर्फ 133 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. अगस्त की बारिश पिछले कई वर्षों में सबसे कम बताई जा रही है. अब सितंबर में भी बारिश की यही स्थिति किसानों के लिए परेशानी बढ़ा रही है.

टाटी-रतोईया नदी के पेट में अब भी पानी की कमी

बारिश की कमी का असर जिले की बरसाती नदियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. टाटी और रतोईया जैसी बरसाती नदियों में अब भी पर्याप्त पानी नहीं है. कई जगह नदी के बीचों-बीच लंबे-लंबे घास दिखाई दे रहे हैं. नदियों में पानी की कमी और बारिश नहीं होने से खेती पर भी असर पड़ रहा है.

धान की फसल बचाने की किसानों के सामने चुनौती

पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों के सामने धान की फसल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. खेतों में फसल को पानी की जरूरत है, लेकिन मानसून के कमजोर रहने से किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी ओर मौसम विभाग की ओर से सप्ताहांत से मानसून की वापसी का अनुमान जताए जाने के बाद किसानों की चिंता और बढ़ गई है.

घाट कुसुंभा में गंगा के उफान का अलग असर

जिले के घाट कुसुंभा प्रखंड क्षेत्र में स्थिति कुछ अलग रही. गंगा के उफान के बाद हरोहर नदी का जलस्तर बढ़ने से खेतों में लगी धान और मक्का की फसल प्रभावित हुई. नदी का पानी बढ़ने से कई इलाकों में लोगों को घरों में कैद होने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा. एक ओर जिले के कुछ हिस्से बारिश की कमी से परेशान हैं, वहीं घाट कुसुंभा क्षेत्र में नदी के बढ़े जलस्तर ने किसानों की मुश्किल बढ़ाई है.

बारिश की उम्मीद में किसान, वैकल्पिक खेती पर भी जोर

फिलहाल जिले के किसानों की नजर आसमान पर टिकी है. अच्छी बारिश की उम्मीद अभी बनी हुई है, लेकिन मानसून की वापसी की संभावना के बीच फसलों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कृषि विभाग की ओर से किसानों को वैकल्पिक खेती के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बारिश की कमी से खेती पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके.

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By Niranjan Kumar

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