विश्व पर्यावरण दिवस पर : जनार्दन सिंह ने लगाए 10 हजार पेड़, नर्सरी से परिवार को दी आर्थिक मजबूती

Sheikhpura News : 15 एकड़ भूमि पर सागवान, शीशम और महोगनी जैसे बहुमूल्य वृक्षों का बड़ा जंगल विकसित कर चुके हैं. एक एकड़ भूमि पर पिछले 15 वर्षों से नर्सरी भी संचालित कर रहे हैं.

Sheikhpura News : (सत्येंद्र कुमार की रिपोर्ट)

जिले के शेखोपुरसराय नगर पंचायत क्षेत्र के नीमी गांव निवासी जनार्दन सिंह ने पर्यावरण संरक्षण को न केवल मिशन बल्कि आजीविका का साधन बना लिया है. पिछले तीन दशकों से चल रहे उनके प्रयासों का परिणाम है कि वे अब तक करीब 10 हजार से अधिक पेड़ लगा चुके हैं.

जनार्दन सिंह अपनी निजी जमीन के साथ-साथ गांव के लोगों से पट्टे पर ली गई लगभग 15 एकड़ भूमि पर सागवान, शीशम और महोगनी जैसे बहुमूल्य वृक्षों का बड़ा जंगल विकसित कर चुके हैं. इसके अलावा वे एक एकड़ भूमि पर पिछले 15 वर्षों से नर्सरी भी संचालित कर रहे हैं.

आजीविका : 5000 पॉपुलर के पेड़ तैयार

जनार्दन सिंह ने बताया कि पेड़-पौधों के प्रति लगाव को उन्होंने आजीविका में बदल दिया. नर्सरी से प्राप्त आय से जहां परिवार का भरण-पोषण हो रहा है, वहीं पेड़ लगाने के अभियान को भी लगातार गति मिल रही है. वर्तमान में उनके द्वारा लगाए गए हजारों पौधे विभिन्न चरणों में विकसित हो रहे हैं.

उनके अनुसार करीब 5000 पॉपुलर के पेड़ लगभग तैयार अवस्था में हैं, जबकि सागवान, शीशम और महोगनी के हजारों पौधे विभिन्न उम्र वर्ग में विकसित हो रहे हैं.

पूरा परिवार जुड़ा है अभियान से

इस पर्यावरणीय पहल में उनका पूरा परिवार सक्रिय रूप से जुड़ा है. पुत्र अभिषेक, जो मैकेनिकल डिप्लोमा धारक हैं, इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं. वहीं पत्नी रूबी कुमारी भी नर्सरी और देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

जनार्दन सिंह बताते हैं कि पिछले 30 वर्षों से वे लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित कर रहे हैं. कई सरकारी कार्यालय परिसरों में भी उनके प्रयास से पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाई गई है.

आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ

जनार्दन सिंह का कहना है कि यदि पौधों की उचित देखभाल की जाए तो यह भविष्य में बड़ी आर्थिक संपत्ति बन सकते हैं। उनके अनुसार एक एकड़ में 10 से 20 वर्षों में लगभग 1 करोड़ रुपये तक की संभावित आय प्राप्त की जा सकती है.

पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

जिला पर्यावरण समिति के सदस्य के रूप में जनार्दन सिंह लगातार लोगों को वानिकी और पौधारोपण के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनके प्रयासों से कई किसान भी अब वानिकी की ओर रुख कर रहे हैं और सागवान, शीशम एवं फलदार वृक्षों की खेती अपना रहे हैं.

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By Rajeev Kumar

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मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण के बाबा सोमेश्वरनाथ नगरी रहने वाले राजीव कुमार ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में पारास्नातक की डिग्री हासिल किया. काम करने के दौरान बेतहर हेडिंग और एनओडी पैकेज पर दो-दो पुरस्कार प्राप्त है.

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