शेखपुरा : जिले में ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से आस्था का केंद्र मोटो खुदा की खुदाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. पांच दिन पूर्व दह से मिट्टी की खुदाई को लेकर प्रशासनिक रोक के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है. दह खुदाई के पक्ष में ग्रामीणों ने शेखपुरा-शेखोपुरसराय सड़क मार्ग […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
शेखपुरा : जिले में ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से आस्था का केंद्र मोटो खुदा की खुदाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. पांच दिन पूर्व दह से मिट्टी की खुदाई को लेकर प्रशासनिक रोक के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है. दह खुदाई के पक्ष में ग्रामीणों ने शेखपुरा-शेखोपुरसराय सड़क मार्ग को मटोखर गांव के समीप घंटों जाम रखा.
इस मौके पर बड़ी तादाद में जुटे महिलाओं में सुमित्रा देवी साबो देवी जुगनू कुमार रजिया देवी समेत सैकड़ों लोगों ने आरोप लगाया कि मिट्टी खुदाई पर प्रशासनिक अधिकारियों ने मनमाने तरीके से रोक लगा दिया है. ग्रामीणों ने दह की खुदाई का मांग करते हुए कहा कि प्राकृतिक जल स्रोत के रूप में शेखपुरा जिले की यह सबसे बड़ी संपत्ति है. इस की खुदाई से सालोंभर इस दह में बड़े पैमाने पर बारिश का पानी जमा रखा जा सकता है. जिससे किसानों को उनके फसलों की सिंचाई की सुविधाएं मिलता रहेगा. शेखपुरा ब्लाक के मटोखर गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने अहले सुबह करीब 8:00 बजे सड़क मार्ग को ठप कर दिया.
इस दौरान बड़ी तादाद में उक्त सड़क मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई. यात्रियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. सड़क जाम की सूचना पर वहां पहुंचे थाने के पुलिस अधिकारियों ने काफी मशक्कत के बाद करीब तीन घंटे के बाद सड़क जाम को छुड़वाया. इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों ने खुदाई की मांग को लेकर प्रभारी जिलाधिकारी निरंजन कुमार झा को लिखित आवेदन भी सौंपा.
क्या है मामला-
जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वकांक्षी मटोखर दह सबसे बड़ी प्राकृतिक जल स्रोत के रूप में अपना महत्व रखता है. पिछले कुछ सालों से बारिश के कमी एवं सतही गाद जम जाने के कारण उक्त जल स्रोत का पानी सूख जाता है. ऐसे में पिछले लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा दह की खुदाई की मांग की जा रही थी. यहां रेलवे कार्य में जुटे एमजीसीपीएल कंपनी को जिला प्रशासन ने दह की खुदाई के लिए निर्देश जारी किया था.
इसके लिए कंपनी ने खनन राजस्व के रूप में करीब 64 लाख रुपये की राशि जमा कराई थी. पिछले एक माह से चल रहे खुदाई कार्य में एक किलोमीटर लंबी मटो खर दह के दक्षिणी हिस्से से मिट्टी का उठाव किया जा रहा था. इसी दरमियान तकनीकी रूप से अनियमितता का मामला सामने आने के बाद अपर समाहर्ता जवाहरलाल ने मिट्टी खुदाई पर 5 दिन पहले ही रोक लगा दिया था. इसी प्रशासनिक रोक के विरोध में शनिवार को मातोखर गांव के सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और खुदाई की मांग करने लगे.
मत्स्य विभाग से नहीं ली गई अनापत्ति
ऐतिहासिक पोखरा का स्वामित्व मत्सव विभाग को है. इसकी नियमित बंदोबस्ती मत्स्यपालको को हैचरी के रूप में कराया जाता है. इसकी बंदोबस्ती में आने वाले राजस्व का लेखा-जोखा मत्स विभाग ही रखता है. जानकारी के मुताबिक माटोखर दह किसी भी जलघर की खुदाई का अधिकार मतस्य विभाग को ही है. मिट्टी खुदाई के बाद जलखर से निकाले गए मिट्टी को तालाब के मेड़ पर ही डालने का प्रावधान है. लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है
कि पोखर की खुदाई के लिए जिला प्रशासन ने ना तो मतस्य विभाग से किसी प्रकार का अनापत्ति लिया बल्कि मिट्टी खुदाई कर अवैध तरीके से इसे कमर्शियल प्रयोग में लाया गया. इस स्थिति में जिला प्रशासन पर मिट्टी खुदाई में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आते ही इस पर इस की खुदाई पर आनन-फानन में रोक लगाया गया.
क्या कहते हैं अधिकारी-
मटोखर दह की खुदाई के लिए एमजीसीपीएल नामक कंपनी के द्वारा खनन विभाग में 66 लाख रुपये का राजस्व जमा कराया है. इसके साथ ही ग्रामीणों की मांग पर मटोखर दह की खुदाई का कार्य कराया जा रहा था. लेकिन फिलहाल खुदाई कार्य पर रोक लगा दिया गया है.