शिवहर मनीष नंदन सिंह की रिपोर्ट
Sheohar News: खरीफ मौसम के आगाज के साथ ही शिवहर जिले में धान की सीधी बुआई (डीएसआर) तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है . पारंपरिक रोपाई की तुलना में यह आधुनिक तकनीक कम पानी, कम श्रम और बेहद कम लागत में धान उत्पादन का एक प्रभावी विकल्प साबित हो रही है . कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर की वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने बताया कि जिले में हो रही मौजूदा बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी है, जो इस तकनीक के लिए बिल्कुल अनुकूल है . उन्होंने किसानों को मध्यम अवधि वाली किस्में जैसे राजेंद्र श्वेता, राजेंद्र भगवती, राजेंद्र सरस्वती एवं राजेंद्र कस्तूरी चुनने की सलाह दी है .
खरपतवार नियंत्रण है सबसे बड़ी चुनौती, वैज्ञानिक दवाओं का करें इस्तेमाल
वैज्ञानिकों के अनुसार, सीधी बुआई में खरपतवार (घास-फूस) की समस्या सबसे बड़ी चुनौती होती है, जिससे फसल को 30 से 50 प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है . इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए बुआई के 0-3 दिनों के भीतर पेंडीमेथालिन (3.3 लीटर/हेक्टेयर) या पायराजोसल्फ्यूरॉनएथाइल (25 ग्राम/हेक्टेयर) का छिड़काव करना चाहिए . यदि बुआई के 20-25 दिनों बाद दोबारा खरपतवार उगते हैं, तो बिसपायरीबैक सोडियम (250 मिलीलीटर/हेक्टेयर) का प्रयोग करें . मिश्रित खरपतवारों के लिए एथॉक्सीसल्फ्यूरॉन का उपयोग भी काफी फायदेमंद पाया गया है .
लेजर लैंड लेवलर से समतलीकरण और संतुलित पोषण प्रबंधन जरूरी
कृषि अभियंत्रण विशेषज्ञ डॉ. सौरभ शंकर पटेल ने बताया कि इस तकनीक से रोपाई में लगने वाले समय और मजदूरी की भारी बचत होती है . बेहतर परिणाम के लिए लेजर लैंड लेवलर से खेत का समतलीकरण करें और सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल मशीन से ही बुआई करें . इसके साथ ही, मिट्टी परीक्षण के आधार पर यूरिया को 3-4 भागों में बांटकर डालें तथा फास्फोरस, पोटाश, जिंक और गोबर की सड़ी खाद का संतुलित उपयोग करें . इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और फसल की वृद्धि अच्छी होती है .
