Sheohar News: जिला मुख्यालय स्थित सरोजा सीताराम सदर अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर एक बेहद कड़वी और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है. अस्पताल परिसर में आगजनी जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्रों (फायर एक्स्टिंग्विशर) की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. शनिवार (6 जून 2026) की सुबह करीब 10 बजे मीडिया पड़ताल के दौरान अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जो पोल खुली है, उसने यहाँ भर्ती मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर एक बड़ा और कड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है.
एक साल पहले ही खत्म हो चुकी है वैधता
सदर अस्पताल के सबसे व्यस्त इलाके यानी ग्राउंड फ्लोर पर स्थित ओपीडी (OPD) और दवा वितरण काउंटर के ठीक पास, पिलर में टंगे अग्निशमन यंत्र की वैधता 16 मार्च 2025 को ही पूरी तरह समाप्त हो चुकी है. बेहद कड़क नियम होने के बावजूद, निर्धारित समय सीमा बीते एक साल से भी अधिक का वक्त हो चुका है, लेकिन इन एक्सपायर्ड सिलेंडरों को बदलने या रीफिल कराने की जहमत अस्पताल प्रशासन ने नहीं उठाई. रोज़ाना सैकड़ों की संख्या में इस काउंटर पर दवा लेने और इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों की जिंदगी को इस कदर नजरअंदाज करना प्रबंधन की कड़वी लापरवाही को बयां कर रहा है.
2027 की वैधता के नए स्टिकर
सदर अस्पताल की लापरवाही का खेल यहीं खत्म नहीं होता. अस्पताल परिसर में ही पैथोलॉजी लैब, ब्लड बैंक और सीधे सिविल सर्जन (CS) कार्यालय की ओर जाने वाले मुख्य रास्ते में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा देखने को मिला. यहाँ दीवारों पर लगे तीन अग्निशमन यंत्रों की वैधता समाप्त होने के बाद, उन उपकरणों को रीफिल कराने या बदलने के बजाय, उन पर लगे पुराने स्टिकरों को कड़ाई से हटा दिया गया. उनकी जगह चालाकी से नए स्टिकर चिपका दिए गए हैं, जिन पर वैधता समाप्त होने की आगामी तिथि 29 मई 2027 अंकित कर दी गई है.
आपात स्थिति में कैसे बुझेगी आग
सदर अस्पताल परिसर के भीतर लगे ये अग्निशमन यंत्र किसी भी संभावित शॉर्ट सर्किट या आगजनी की घटना के दौरान शुरुआती नियंत्रण पाने के लिए सबसे प्राथमिक और महत्वपूर्ण साधन माने जाते हैं. लेकिन जब इन उपकरणों की वास्तविक वैधता ही खत्म हो चुकी है और केवल कागजी स्टिकर बदले गए हैं, तो इनकी वास्तविक प्रभावशीलता और क्षमता पूरी तरह शून्य हो चुकी है. यदि अस्पताल के भीतर कोई अप्रिय घटना या आपात स्थिति पैदा होती है, तो समय रहते आग पर काबू पाना नामुमकिन हो जाएगा, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है.
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
इस कड़वी और जानलेवा लापरवाही को लेकर स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने सिविल सर्जन और जिला प्रशासन से इस पूरे स्टिकर घोटाले और एक्सपायर्ड अग्निशमन यंत्रों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील सरकारी संस्थान में ऐसी कड़वी कोताही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले व्यवस्था को कड़ाई से दुरुस्त किया जा सके.
