Sheohar News: जेठ के महीने की शुरुआत के साथ ही शिवहर जिले में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी ने अपनी सख्त अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी है. अचानक बढ़े तापमान और पछुआ हवा के हल्के थपेड़ों ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है. चिलचिलाती धूप की इस तपिश के बीच राहगीरों और स्थानीय लोगों को राहत देने के लिए गन्ने का रस सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है. शिवहर-पिपराही मुख्य पथ पर इन दिनों ठंडे-मीठे गन्ने के रस से अपने कंठ को तर करने और दिल को सुकून हासिल करने के लिए गन्ने के ठेलों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
आजीविका का मुख्य सहारा है गन्ने का ठेला
पिपराही मुख्य पथ पर एक घने पेड़ की छांव में गन्ने की रस पेरने वाली मशीन लगाने वाले संचालक अरुण कुमार ने इस बदलते मौसम और अपनी आजीविका को लेकर कई बातें साझा कीं. उन्होंने बताया कि यह छोटा सा ठेला ही उनके जीवन यापन और आमदनी का मुख्य जरिया है, जिसके दम पर वे अपने छह सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करते हैं. ग्राहकों की जेब का ख्याल रखते हुए अरुण वर्षों से मात्र 10 और 20 रुपये प्रति गिलास की दर से शुद्ध और हाइजीनिक गन्ने का रस परोसने की परंपरा को जारी रखे हुए हैं. सोमवार को भी उन्होंने रोजाना की तरह सुबह 10:30 बजे मुख्य मार्ग के किनारे अपना ठेला लगाया था, लेकिन आज का नजारा बेहद बदला हुआ था.
अचानक बढ़े पारे से दुकान पर उमड़ी ग्राहकों की भीड़
संचालक अरुण कुमार ने बताया कि पिछले दो दिनों से धूप की सख्ती काफी बढ़ गई है और हवा का मिजाज भी गर्म होने लगा है. इसी भीषण तपिश का असर रहा कि आज सुबह जैसे ही दुकान खुली, गन्ने का रस पीने के लिए ग्राहकों की होड़ मच गई. चिलचिलाती धूप से बेहाल राहगीर अपनी प्यास बुझाने के लिए उतावले दिखे और कोई एक तो कोई दो-दो गिलास गन्ने के रस का ऑर्डर देने लगा.
बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह 10:30 बजे दुकान खोलने के बाद महज दो घंटे के भीतर यानी दोपहर 12:30 बजे तक अरुण ने करीब 500 रुपये का रस बेच डाला था. अरुण ने उम्मीद जताई है कि मौसम के इस तल्ख मिजाज के बीच आज का दिन उनके व्यापार और परिवार की आर्थिक स्थिति के लिए काफी बेहतर और मुनाफे वाला साबित होगा.
शिवहर के पिपराही से मकसूद आलम की रिपोर्ट
