Sheohar News: मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद शिवहर प्रशासन सख्त, अस्पतालों और होटलों में फायर सेफ्टी ऑडिट से मचा हड़कंप

Sheohar News: मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के बाद शिवहर में प्रशासन सख्त हो गया है. डीएम प्रतिभा रानी के निर्देश पर अस्पतालों, होटलों और रेस्टोरेंट में फायर सेफ्टी ऑडिट के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आई हैं.

Sheohar News: मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुई दर्दनाक अग्निकांड की घटना ने पूरे बिहार सहित देश को झकझोर कर रख दिया है. इस भीषण हादसे के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है और समूचे प्रदेश में फायर ऑडिट कराने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है. इसी कड़ी में शिवहर जिले में भी अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग द्वारा भारी सख्ती बरती जा रही है.

शिवहर की जिलाधिकारी (डीएम) प्रतिभा रानी के विशेष निर्देश पर जिला अग्निशमन पदाधिकारी रवि कुमार रुद्रा के नेतृत्व में अग्निशमालय की फायर सेफ्टी टीम ने शनिवार को शहर के विभिन्न संस्थानों में सघन जांच और ऑडिट अभियान चलाया. इस औचक निरीक्षण के दौरान टीम ने शहर के कई होटलों, रेस्टोरेंटों के साथ-साथ सरकारी एवं निजी अस्पतालों का भी जायजा लिया ताकि आग लगने जैसी आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था को परखा जा सके.


जांच में खुली पोल: उपकरणों के साथ संवेदनशीलता की भी भारी कमी

फायर सेफ्टी टीम द्वारा किए गए इस व्यापक निरीक्षण के बाद सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर खामियां और विसंगतियां उजागर हुई हैं. अधिकारियों के अनुसार, संस्थानों में न केवल आग बुझाने वाले जरूरी उपकरणों की भारी कमी पाई गई, बल्कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने को लेकर प्रबंधन में संवेदनशीलता और जागरूकता का भी घोर अभाव देखा गया है.


होटलों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां: ये 3 बड़ी खामियां आईं सामने

जांच टीम को शहर के अधिकांश आवासीय और व्यावसायिक होटलों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी के निम्नलिखित मुख्य बिंदु मिले हैं:

  • एक ही प्रवेश और निकास मार्ग: शहर के अधिकांश होटलों में आने-जाने के लिए केवल एक ही प्रवेश व निकास द्वार बना हुआ है.
  • अत्यंत संकीर्ण सीढ़ियां: आपात स्थिति में तेजी से बाहर निकलने के लिए सीढ़ियों की चौड़ाई मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है. वर्तमान में होटलों में केवल दो से तीन फीट चौड़ी सीढ़ियां ही उपलब्ध हैं. इसके कारण भगदड़ की स्थिति में ठहरने वाले लोगों को बाहर निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
  • शीशे की बंद दीवारें (ग्लास फसाद): आवासीय होटलों को सुंदर लुक देने के लिए उन्हें चारों तरफ से पूरी तरह शीशे (सीसा) से बंद कर दिया गया है. वेंटिलेशन न होने और बंद शीशों के कारण आपातकाल के समय बड़े हादसे होने की आशंका व्यक्त की जा रही है.

एक नजर में देखें: शिवहर फायर सेफ्टी ऑडिट प्रोफाइल

ऑडिट का मुख्य विवरणजांच के मुख्य बिंदु और निष्कर्ष
मार्गदर्शक व नेतृत्वकर्ताडीएम प्रतिभा रानी के निर्देश पर जिला अग्निशमन पदाधिकारी रवि कुमार रुद्रा.
जांच के दायरे में आए संस्थानकई होटल, सरकारी एवं निजी अस्पताल और रेस्टोरेंट.
सीढ़ियों की वास्तविक चौड़ाईमानकों के विपरीत मात्र 2 से 3 फीट चौड़ी सीढ़ियां मिलीं.
मुख्य संरचनात्मक खतरासौंदर्य के लिए चारों तरफ से शीशे से बंद इमारतें और सिंगल प्रवेश-निकास मार्ग.

प्रशासनिक दृष्टिकोण: मुजफ्फरपुर अस्पताल हादसे से सबक लेते हुए शिवहर जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग सुरक्षा मानकों को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपना रहा है. फायर सेफ्टी टीम द्वारा चिन्हित की गई इन खामियों को दूर न करने वाले संस्थानों पर आने वाले दिनों में कड़ी कानूनी गाज गिर सकती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Aaruni Thakur

प्रभात खबर में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत आरुणि ठाकुर, पत्रकारिता के क्षेत्र में गहरी रुचि रखते हैं। देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वर्तमान में वे समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर कर रहे हैं। विस्तार न्यूज और इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में अनुभव प्राप्त आरुणि को हाइपरलोकल खबरों, राजनीति और डॉक्यूमेंट्री निर्माण में विशेष रुचि है।

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