Organic Farming Sheohar: शिवहर प्रखंड क्षेत्र के हरनाही गांव में जिला कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से “संतुलित उर्वरक का उपयोग” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों और कृषक महिलाओं को संतुलित उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करना था, ताकि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे और फसल उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके.
मंडी और मौसम के बाद अब ग्रामीण विकास और कृषि से जुड़ी यह खबर शिवहर के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
- पोषण वाटिका के लिए पौधा वितरण: इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 33 प्रतिभागियों ने भाग लिया. इन सभी को अपने घरों में पोषण वाटिका विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया और केंद्र की ओर से लौकी, सहजन और करेले के पौधे वितरित किए गए.
- वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण सलाह: केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी और गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. एन.एच.एम. एलिंग ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के गुण सिखाए. उन्होंने विशेष रूप से खेतों में मृदा परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग) के आधार पर ही खाद डालने की सलाह दी.
- अत्यधिक रासायनिक खादों पर चेतावनी: वैज्ञानिकों ने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार घटती है. इससे बचने के लिए उन्होंने जैविक और हरी खाद को अधिक से अधिक अपनाने पर बल दिया.
- लागत में कमी और अतिरिक्त आय: प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर भी विस्तृत चर्चा हुई कि किस तरह वैज्ञानिक तौर-तरीके अपनाकर खेती की लागत को कम किया जा सकता है, पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकता है और गृह वाटिका के माध्यम से परिवार के लिए अतिरिक्त आय जुटाई जा सकती है.
- प्रमुख लोगों की उपस्थिति: इस ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण कार्यक्रम के मौके पर लक्ष्मी देवी, इंदु देवी, प्रभु पासवान सहित क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान और ग्रामीण उपस्थित थे.
