Devshayani Ekadashi: देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ हो गया है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह चार माह का समय आत्मशुद्धि, संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष महत्व रखता है.
राजलक्ष्मी ग्रुप के निदेशक देवव्रत नंदन सिंह उर्फ सोनू बाबू ने कहा कि चातुर्मास मनुष्य को सात्विक जीवन अपनाने, आत्मचिंतन करने और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है.
119 दिनों तक चलता है चातुर्मास
उन्होंने बताया कि चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक लगभग 119 दिनों का होता है.
इस अवधि में श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह शामिल रहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं. इसी कारण विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.
साधु-संत देते हैं धर्म और सदाचार का संदेश
देवव्रत नंदन सिंह ने कहा कि वर्षा ऋतु में साधु-संत एक स्थान पर रहकर जीवों की रक्षा करते हैं और लोगों को धर्म, सदाचार तथा आध्यात्मिक जीवन का संदेश देते हैं.
उन्होंने बताया कि चातुर्मास का मूल उद्देश्य आत्मशुद्धि, इंद्रिय संयम और अनुशासित जीवन के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना है.
विष्णु और शिव आराधना का विशेष महत्व
उन्होंने कहा कि इस अवधि में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, सात्विक भोजन, उपवास और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है.
साथ ही धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के दौरान सृष्टि के संचालन और कल्याण की जिम्मेदारी भगवान शिव निभाते हैं. इसलिए चातुर्मास में भगवान शिव की आराधना, रुद्राभिषेक और शिव पूजन भी अत्यंत शुभ माना जाता है.
इन बातों का पालन करने की अपील
देवव्रत नंदन सिंह ने लोगों से चातुर्मास के दौरान प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील की.
उन्होंने कहा कि इस अवधि में क्रोध, असत्य और निंदा का त्याग कर धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए. साथ ही गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान, कम बोलना, भूमि पर शयन तथा संयमित जीवन अपनाने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होने की बात कही. उन्होंने नए मांगलिक कार्यों और अनावश्यक लंबी यात्राओं से भी परहेज करने की सलाह दी.
