शिवहर के पिपराही से मकसूद आलम की रिपोर्ट
Sheohar News: पिपराही प्रशासन द्वारा घर तोड़े जाने के विरोध में हैदर अली (रंगरेज) अपने परिवार और समर्थकों के साथ प्रखंड मुख्यालय सह अंचल कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं. धरनार्थियों ने प्रशासन से पुनर्वास की मांग की है.
हैदर अली ने बताया कि संबंधित भूमि को लेकर वाद संख्या 8/2024 अपील टाइटल सूट अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, शिवहर की अदालत में लंबित है. उनका दावा है कि वर्ष 1945 में तत्कालीन शिवहर राजा गिरीश नंदन सिंह द्वारा उन्हें ढाई डिसमिल भूमि का पट्टा दिया गया था, जिसकी रसीद उनके पास उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1972 तक उस भूमि की रसीद भी कटती रही.
प्रशासन पर लगाया जल्दबाजी में कार्रवाई का आरोप
हैदर अली के अनुसार वर्ष 1960 के सर्वेक्षण के दौरान उक्त भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अनुमंडल दंडाधिकारी के आदेश पर 30 मई 2026 को उनके घर पर नोटिस चस्पा किया गया और उसके बाद प्रशासन ने मकान को ध्वस्त कर दिया. इस दौरान घर में रखे सामान भी क्षतिग्रस्त हो गए. उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनके परिवार के पास रहने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है.
पुनर्वास की मांग को लेकर धरना
धरना पर बैठे लोगों का कहना है कि हैदर अली और उनके परिवार को रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए. इस मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग भी धरने में शामिल हुए हैं.
धरना में कामरेड जगनारायण साह, रसोई संघ के प्रदेश महासचिव वशिष्ठ रावत, भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव जगन्नाथ पासवान, रामनरेश कुमार, सच्चिदानंद सिंह, सुधीर कुमार सिंह, राजकुमार पासवान, मनोहर राम, विजय राम, सोमन पासवान, मो. मोईम, रामदेव साहनी, बाली बैठा और अभिराम सिंह समेत अन्य लोग शामिल हैं.
प्रशासन का पक्ष
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी आदित्य कुमार सौरव ने बताया कि संबंधित भूमि अतिक्रमित थी और न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उसे खाली कराया गया है.
