Sasaram News : तेज रफ्तार कार के धक्के से दो युवकों की मौत, रोड जाम

सासाराम-आरा मुख्य पथ पर सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की जान चली गयी.

बिक्रमगंज /संझौली. सासाराम-आरा मुख्य पथ पर सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की जान चली गयी. यह घटना संझौली थाना क्षेत्र के बैरी टोला के समीप हुई, जहां तेज रफ्तार कार व बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गयी. बाइक पर सवार दोनों युवक बिक्रमगंज थाना अंतर्गत मतुली गांव से संझौली बाजार करने जा रहे थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक जैसे ही बैरी और सोनी गांव के बीच पहुंची, सामने से आ रही तेज रफ्तार कार ने सीधी टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार झलु उर्फ गोपाल कुमार (उम्र 18 वर्ष), पिता पप्पू कहार की मौके पर ही मौत हो गयी. गंभीर रूप से घायल दूसरे युवक पवन कुमार (उम्र 32 वर्ष), पिता बिमलेश पासवान को स्थानीय लोगों ने संझौली पीएचसी में भर्ती कराया. प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सासाराम रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया. दोनों युवक बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के मतुली गांव के निवासी थे. हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया. मुआवजे की मांग को लेकर लोगों ने करीब एक घंटे तक मुख्य पथ को जाम कर दिया. सूचना पर पहुंचे संझौली थानाध्यक्ष शिव कुमार मंडल, बिक्रमगंज पुलिस और अनुमंडल पदाधिकारी प्रभात कुमार ने लोगों को समझा कर जाम हटवाया, तब जाकर पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सासाराम भेज दिया है. हादसे में शामिल कार का चालक मौके से फरार हो गया. वाहन स्वामियों की पहचान लखनऊ निवासी इमरान खान और अंशार खान के रूप में की गयी है. पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है. सोमवारी व्रत के लिए फल लाने निकले थे दोनों युवक सावन की अंतिम सोमवारी को फल लाने निकले दो युवकों की सड़क हादसे में मौत ने बिक्रमगंज प्रखंड के मतुली गांव को गहरे शोक में डूबो दिया. मृतक झल्लू उर्फ गोपाल कुमार (18 वर्ष), पिता पप्पू कहार और पवन कुमार पासवान (32 वर्ष), पिता बिमलेश पासवान, सोमवारी व्रत के लिए घर की महिलाओं के कहने पर बाइक से संझौली जा रहे थे. उसी दौरान तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी, जिसमें झल्लू की घटनास्थल पर और पवन की अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गयी. हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, हर तरफ कोहराम मच गया. जिन महिलाओं ने दोनों को भेजा था, वे सदमे में हैं. रोते हुए बस इतना ही कह सकीं, “हमने ही भेजा था, अब किससे कहें?. पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा. अधिकतर घरों में चूल्हे तक नहीं जले. रिश्तेदारों और ग्रामीणों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे. स्थानीय शिक्षक रविशंकर शर्मा ने कहा, किसने सोचा था कि सावन की पवित्र सोमवारी पर गांव से दो अर्थियां उठेंगी? दोनों युवक मैट्रिक पास थे और आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे थे. अब उनके परिवारों में केवल एक-एक संतान बची है. यह हादसा सिर्फ दो जिंदगियों का अंत नहीं, पूरे गांव की उम्मीदों को तोड़ गया.

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