मध्य विद्यालय घुसियांकलां में कई दिनों से चापाकल खराब, पेयजल संकट

जिले के घुसियांकलां स्थित मध्य विद्यालय का एकमात्र चापाकल पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है.

बिक्रमगंज. जिले के घुसियांकलां स्थित मध्य विद्यालय का एकमात्र चापाकल पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है. विद्यालय में 530 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और परिसर में चार-चार मतदान केंद्र भी अवस्थित हैं. इसके बावजूद अब तक इस चापाकल की मरम्मत नहीं हो सकी, जिससे विद्यालय परिवार के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि चापाकल में पलंजर या वॉशर की खराबी हो सकती है. स्थानीय मिस्त्रियों को कई बार बुलाकर दिखवाया गया, मगर वे दुरुस्त नहीं कर पाये. आखिरकार विद्यालय परिवार को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचइडी) को लिखित शिकायत करनी पड़ी. लेकिन शिकायत करने के बाद भी आज तक कोई निवारण नहीं हुआ. जबकि, कुछ दिन पहले ही रोहतास जिला प्रशासन ने गांव-गांव में खराब पड़े चापाकलों को दुरुस्त करने के लिए विशेष टीम के गठन की घोषणा की थी और जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया था. लेकिन, इन घोषणाओं का असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा. 500 से अधिक बच्चों और मतदाताओं की जरूरतों को नजरअंदाज किये जाने से प्रशासनिक दावों की पोल खुल रही है. विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि जब इतने महत्वपूर्ण स्थल पर भी समस्या का समाधान समय पर नहीं हो सका, तो टीम गठन और प्रशासनिक आदेश का क्या मतलब रह जाता है. पढ़ाई व विद्यालय की स्वच्छता व्यवस्था बाधित घुसियां कलां मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक शमशाद अली ने बताया कि चापाकल खराब रहने से बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की स्वच्छता व्यवस्था बाधित हो रही है. छात्र-छात्राएं पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं, या यूं कहे कि पानी के लिए पानी पानी हो रहे हैं. और अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो मतदान के समय मतदाताओं को भी परेशानी होगी. –बोले कनीय अभियंता इस मामले पर बिक्रमगंज पीएचइडी के सहायक अभियंता सुमित कुमार ने कहा विभाग की ओर से आज ही मिस्त्री भेजकर चापाकल को दुरुस्त कराया जायेगा. हालांकि, विद्यालय प्रबंधन और ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित दिख रही हैं, जबकि हकीकत में हालात जस के तस बने हैं. …….विद्यालय के 530 छात्र-छात्राएं पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे स्कूल में चार मतदान केंद्र होने के बाद भी प्रशासनिक उदासीनता

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Published by: Anurag sharan

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