Sasaram News : राधा-कृष्ण संग झूमे नौनिहाल

धवार की दोपहर एबीआर फाउंडेशन और एबीआर किड्स फाउंडेशन का परिसर किसी मंदिर की भांति सजा हुआ था.

सासाराम ऑफिस. बुधवार की दोपहर एबीआर फाउंडेशन और एबीआर किड्स फाउंडेशन का परिसर किसी मंदिर की भांति सजा हुआ था. रिमझिम फुहारें बरस रही थीं और चारों ओर कान्हा-राधा के रूप में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चों की मुस्कान वातावरण को भक्ति रस से भर रही थी. जैसे ही मंच पर कृष्ण भजनों की गूंज उठी, पूरा परिसर गोकुल, मथुरा और वृंदावन में बदल गया. जब रंग-बिरंगे परिधानों में सजे छोटे-छोटे कृष्ण अपनी बांसुरी की धुन पर थिरकते दिखे. सामने राधा और गोपियों की कतारें थीं, जिनकी अदाओं ने दर्शकों का मन मोह लिया. तभी शुरू हुआ रासलीला का मंचन, कृष्ण-सुदामा का मिलन और कालिया नाग दमन के दृश्य देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो उठे. तालियों की गड़गड़ाहट ने बच्चों का हौसला बढ़ाया. सबसे रोमांचक क्षण आया, जब गोविंदा आला रे की गूंज के बीच मटकी-फोड़ कार्यक्रम शुरू हुआ. बच्चे मानो असली ग्वाल-बाल बन गये थे. हवा में लटकी मटकी को तोड़ते समय उनके चेहरे की चमक और जोश देखने लायक था. दर्शकों की आंखें खुशी से चमक उठीं और हर तरफ से जय कान्हा की आवाज गूंज उठी. नालंदा, सारनाथ, तक्षशिला और वैशाली हाउस के छात्र-छात्राओं ने बारी-बारी से कृष्ण जन्म, यमुना पार ले जाए जाते बालकृष्ण, शेषनाग का दर्शन और गोकुल वासियों को कालिया नाग से मुक्ति जैसे दृश्य प्रस्तुत किये. सुदामा बने सन्नी कुमार को लोग बार-बार तालियां देकर सराह रहे थे. कालिया नाग बने शशांक, आदित्य राज और हेमंत कुमार ने भी मंच पर ऐसा प्रभाव छोड़ा कि दर्शक दंग रह गये. वहीं, नालंदा हाउस के निर्देशक निर्जेश मिश्रा ने कहा ऐसे आयोजनों से बच्चों में अध्यात्म का बीज पड़ता है. सारनाथ हाउस के इंचार्ज पंचम पांडेय ने कहा मित्रता में प्रेम और समर्पण जरूरी है, यही संदेश हम बच्चों को दे रहे हैं. वैशाली हाउस की इन्चार्ज जया प्रभा ने मंच से कहा कृष्ण की बाल लीलाएं हमें सादगी और भक्ति का मार्ग दिखाती हैं. मंच के सामने मौजूद स्कूल की निदेशिका अनुपमा सिंह ने कहा कि आज बच्चों ने जिस तरह से अपनी प्रस्तुतियां दीं, उससे स्पष्ट है कि उनमें भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान है. हमें गीता के उपदेशों को जीवन में उतारना चाहिए. वहीं, निदेशक डॉ पृथ्वीपाल सिंह ने उत्साहित भाव से कहा कि आज का दिन यह बताता है कि जब शिक्षा और संस्कृति साथ मिलती है, तो परिणाम भक्ति और आनंद का अद्भुत संगम होता है. वास्तव में, यह आंखों देखा नजारा भक्ति, उल्लास और भारतीय संस्कृति का ऐसा संगम था, जिसे हर कोई अपने दिल में लंबे समय तक संजोए रखेगा.

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