Sasaram News : गरीबों को सरकारी जमीन देने में आनाकानी कर रही है सरकार : अशोक

वर्ष 1947 में अंग्रेजों से देश के हाथ में सत्ता आयी थी. उस समय केंद्र में सत्तासीन कांग्रेस की सरकार ने अपने शासक वर्ग के भू स्वामियों के पक्ष में जमीन कर दिया था.

सासाराम सदर. वर्ष 1947 में अंग्रेजों से देश के हाथ में सत्ता आयी थी. उस समय केंद्र में सत्तासीन कांग्रेस की सरकार ने अपने शासक वर्ग के भू स्वामियों के पक्ष में जमीन कर दिया था. उस समय कांग्रेस सरकार द्वारा भूमि सुधार का कार्य आधा-अधुरा कर छोड़ दिया. इसका नतीजा है कि आज भी हदबंदी से फाजिल, भूदान से मिला और सरकारी गैर मजरुआ लाखों एकड़ जमीन मौजूद है. इसके बावजूद केंद्र व राज्य की सरकार उन जमीन को गरीबों के बीच वितरण करने में आनाकानी कर रही है. उक्त बातें अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन गुरुवार को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश सचिव अशोक बैठा ने कहीं. उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसा के अनुसार किसानों को कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना चाहिए. लेकिन, केंद्र सरकार किसान आंदोलन की इस महत्वपूर्ण मांग की लगातार उपेक्षा कर रही है. जमीन मांगते हैं, तो सरकार बांटती है चश्मा देश में कई प्रदेशों से पहुंचे प्रांतीय नेताओं ने भी राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया. नेता ने कहा कि सरकार गरीबों को जमीन देने की जगह लॉलीपॉप दिखा रही है. जब हम जमीन मांगते हैं तो बिहार के मुख्यमंत्री चश्मा और रेडियो बांट मांग को प्रभावित करते हैं. बिहार सरकार द्वारा भूमि सुधार के लिए गठित डी बंद्योपाध्याय आयोग की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं कर सकी है और इसे लागू करने का सरकार का इरादा भी नहीं दिख रहा है. सम्मेलन को अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के राष्ट्रीय सम्मेलन को अरविंद सिन्हा, ओड़िसा के प्रांतीय कमेटी के सह संयोजक श्रीकांत मोहंती, ओड़िशा के प्रदेश सचिव शंभु महतो, नंदकिशोर सिंह, किर्ती किसान यूनियन पंजाब के नेता हरदेव सिंह संधू, प्रसादन्ना, पीके शाही, उन्नी कृष्णन, पीके राजन, आर माधवन रेड्डी, महाराष्ट्र प्रदेश के नेता बाबुराव कुम्भरगांव, सोनू दबंग, बाचा बाबू कुमार आदि ने संबोधित किया.

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