Sasaram News : मध्याह्न भोजन कर्मियों की हड़ताल का विद्यालयों में दिखने लगा असर

सरकारी स्कूलों में चलने वाले मध्याह्न भोजन कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों के चार दिनों से हड़ताल पर रहने के कारण अब जिले में पीएम पोषण योजना प्रभावित होने लगा है.

सासाराम ऑफिस. सरकारी स्कूलों में चलने वाले मध्याह्न भोजन कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों के चार दिनों से हड़ताल पर रहने के कारण अब जिले में पीएम पोषण योजना प्रभावित होने लगा है. बताते हैं कि जिले में मई माह तक रसोइयों का वेतन भुगतान किया जा चुका है. साल में दो माह जून और मार्च माह का भुगतान नहीं किया जाता है. जुलाई माह का उनका भुगतान जिला में राशि के अभाव में नहीं किया जा सका था. अब राशि जिला को प्राप्त हो चुकी है, लेकिन कर्मियों के हड़ताल पर रहने के कारण उनके मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है. अभी रसोइयों का तीज व्रत राशि के अभाव में कैसे बिता इसे सहज ही समझा जा सकता है. तुरंत कुछ दिनों बाद जीवित्पुत्रिका व्रत आने वाला है. अगर कर्मी हड़ताल पर रहे तो सम्भवतः उक्त व्रत तक भी रसोइयों का भुगतान नहीं हो पायेगा. यही नहीं कर्मियों के हड़ताल पर रहने के कारण जिले के कई विद्यालयों में राशि और खाद्यान्न के अभाव में पीएम पोषण योजना के प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. बीते 26 अगस्त से कर्मियों के हड़ताल पर रहने के कारण अब विद्यालयों का रेगुलर निरीक्षक नहीं हो पा रहा है. यही नहीं आने वाले एक सितंबर को विद्यालयों से प्राप्त प्रपत्र क की इंट्री करने के उपरांत ही केंद्र सरकार व राज्य सरकार की तरफ से परिवर्तन मद की राशि आवंटित होती है, जो जिलों को प्राप्त होती हैं, जिससे विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनता है. अगर कर्मी हड़ताल पर रहे तो प्रपत्र क की इंट्री नहीं होने के कारण वह राशि भी प्राप्त नहीं हो पायेगी. इससे विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनना बंद हो सकता है. सरकार की अति महत्वपूर्ण इस योजना को मूर्त रूप देने में लगे कर्मियों की मांग पर अगर सरकार सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं करती है तो यह आंदोलन लंबा भी खींच सकता है. जिले में पीएम पोषण योजना के सफल संचालन के लिए कुल 23 कर्मी, एक जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, एक जिला लेखपाल, दो जिला साधन सेवी और 19 प्रखंड साधन सेवी कार्यरत है, जो अपनी मांग को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इस संबंध में संघ के जिलाध्यक्ष मो अब्दुल्ला ने कहा कि संघ के राज्य कार्यकारिणी के आदेश पर पूरे बिहार के मध्याह्न भोजन कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. उन्होंने कहा कि संघ द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत एक सितंबर को सभी कर्मी निदेशालय पटना के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे. इसके बाद दो सितंबर को गर्दनीबाग पटना स्थित धरना स्थल पर मांग के पूर्ण होने तक सभी कर्मियों द्वारा धरना प्रदर्शन किया जायेगा. सरकार से हमारी मात्र एक छोटी सी मांग है कि बिहार शिक्षा परियोजना में कार्यरत कर्मियों के समतुल्य मध्याह्न भोजन योजना से संबंधित कर्मियों को भी वेतन व अन्य सुविधा दी जाये. प्रदर्शन में मध्याह्न भोजन कर्मचारी संघ के सदस्य जिला समन्वयक विजय प्रसाद, लेखापाल मृत्युंजय भौमिक, जिला साधन सेवी प्रमोद कुमार, प्रखंड साधन सेवी किरण कुमारी पाठक, पूनम श्रीवास्तव, माधुरी कुमारी, मंजू देवी, शिवानंद प्रसाद, अमित कुमार, रमाशंकर गुप्ता, जितेंद्र कुमार, अरविंद कुमार, संतोष कुमार, प्रमोद कुमार, शिव शंकर राम, श्याम जी सिन्हा, पूर्णवासी राम, ललन पासवान, रामजी सिंह, अतहर हुसैन, जाकिर खान, समशुल आफरीन आदि उपस्थित थे. भोजन बनाने व परोसने के लिए 6122 रसोइया कार्यरत रोहतास जिले में कुल 2033 सरकारी विद्यालय है, जिनमें मध्याह्न भोजन योजना संचालित है. पीएम पोषण योजना के तहत मध्याह्न भोजन योजना संचालित विद्यालयों में 1209 प्राथमिक विद्यालय, 806 प्राथमिक सह मिडिल स्कूल के अलावा 18 वैसे विद्यालय हैं जहां केवल अपर प्राइमरी के बच्चों की पढ़ाई होती है. प्रखंड वाइज विद्यालयों की स्थिति के अनुसार अकोढ़ीगोला प्रखंड में 85 विद्यालय, बिक्रमगंज में 101 विद्यालय, चेनारी में 101 विद्यालय, दावथ में 81 विद्यालय, डेहरी में 119 विद्यालय, दिनारा में 172 विद्यालय, करगहर में 183 विद्यालय, काराकाट में 156 विद्यालय, कोचस में 123 विद्यालय, नासरीगंज में 90 विद्यालय, नवहट्टा में 84 विद्यालय, नोखा में 131 विद्यालय, राजपुर में 63 विद्यालय, रोहतास में 54 विद्यालय, संझौली में 48 विद्यालय, सासाराम में 177 विद्यालय, शिवसागर में 150 विद्यालय, सूर्यपुरा में 48 विद्यालय व तिलौथू में 67 विद्यालय है. उक्त विद्यालयों में बच्चों को मध्याह्न भोजन बनाने व परोसने के लिए 6122 रसोइया सह सहायक कार्यरत है.

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